अब हर महीने कमा रहे 50-60 हजार रुपए
रायपुर (BCC NEWS 24): प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करके उन्हें संगठित क्षेत्र में लाना और सशक्त बनाना है। बस्तर अंचल अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के उद्यमशील सपनों और आत्मनिर्भरता के नए प्रतिमानों के लिए भी जाना जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना यहाँ के ग्रामीण युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का एक सबसे मजबूत और विश्वसनीय माध्यम बनकर उभरी है। बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड अंतर्गत ग्राम पोटानार निवासी श्री कृष्णदेव मिश्रा इस जमीनी बदलाव की एक ऐसी प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने न केवल सरकारी योजना का लाभ उठाकर अपना स्वरोजगार स्थापित किया, बल्कि आज पूरे क्षेत्र में एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।
वित्तीय सहायता और शासकीय अनुदान व्यावसायिक सपनों को पंख देने का किया काम
कृष्णदेव ने बताया कि पिछले वर्ष उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजनान्तर्गत 15 लाख रुपये की महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता और शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ था। इस पूंजी ने उनके व्यावसायिक सपनों को पंख देने का काम किया। उन्होंने इस राशि का सदुपयोग किया और क्षेत्र में एक आधुनिक बेकरी एवं स्वीट्स निर्माण इकाई स्थापित की। आज इस इकाई में विभिन्न प्रकार के बेकरी उत्पाद जैसे ब्रेड, बिस्कुट, केक और पारंपरिक व आधुनिक मिठाइयाँ पूरी स्वच्छता और गुणवत्ता के साथ तैयार की जा रही हैं।
मजबूत सप्लाई चैन और बढ़ती बाजार मांग
एक कुशल रणनीतिकार की तरह कृष्णदेव ने न केवल उत्पादन पर ध्यान दिया, बल्कि बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बनाने के लिए एक मजबूत नेटवर्क भी तैयार किया। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा निर्मित शुद्ध और स्वादिष्ट उत्पादों की मांग बस्तर के स्थानीय बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में उनके संस्थान से तैयार होने वाले उत्पादों की आपूर्ति स्थानीय व्यवसायियों, किराना दुकानों, चाय-नाश्ते के होटलों और आसपास के साप्ताहिक बाजारों में की जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण अंचल के उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर फ्रेश और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध करवा रहे हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति हुई सुदृढ़
बेकरी व्यवसाय से हर महीने 50 से 60 हजार रुपये की शुद्ध आय
कृष्णदेव बताते हैं कि इस उद्यम ने न सिर्फ मुझे अपने पैरों पर खड़ा किया है, बल्कि आज मुझे इस बेकरी व्यवसाय से हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। इस व्यवसाय से होने वाली निरंतर और अच्छी आय की बदौलत उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हुई है।
ग्रामीण युवाओं के लिए रोल मॉडल बने कृष्णदेव
बस्तर के सुदूर ग्रामीण अंचल के कृष्णदेव मिश्रा की यह सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि सही समय पर सरकार का मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति का मेल हो जाए, तो अवसरों की कोई कमी नहीं है। कृष्णदेव आज तोकापाल और आसपास के विकासखंडों के उन सैकड़ों युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं, जो नौकरी की तलाश करने के बजाय स्वयं का रोजगार स्थापित कर जॉब प्रोवाइडर बनने का सपना देखते हैं।

(Bureau Chief, Korba)




