रायपुर : धमतरी में कल सजेगा ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेला

          ट्राइफेड के संग स्थानीय हुनर भरेगा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उड़ान

          ​रायपुर (BCC NEWS 24): छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों में रचने-बसने वाली अनूठी जनजातीय कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और प्राकृतिक वनोपजों को अब देश और दुनिया के बड़े बाजारों में एक नई पहचान मिलने जा रही है। धमतरी जिले के जनजातीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्थानीय उद्यमियों के हुनर को आर्थिक मजबूती देने के ध्येय से 21 अगस्त 2026 को आजीविका महाविद्यालय, धमतरी में एक वृहद ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेले’ का आयोजन किया जा रहा है।

          जनजातीय कार्य मंत्रालय (भारत सरकार) के अधीन कार्यरत्त भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ (ट्राइफेड) के छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जिला प्रशासन धमतरी के विशेष सहयोग से आयोजित यह मेला केवल एक प्रदर्शनी भर नहीं है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों को सीधे राष्ट्रीय विपणन नेटवर्क से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु सिद्ध होगा।

          ​राष्ट्रीय मंच और ट्राईब्स इंडिया के दरवाज़े खोलती एक पहल

          इस मेले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें भाग लेने वाले पात्र जनजातीय कारीगरों और उत्पादक समूहों का ट्राइफेड (TRIFED) के साथ एम्पेनलमेंट (सूचीबद्धता) किया जाएगा। एक बार पंजीकृत हो जाने के बाद, इन कारीगरों को देश भर में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों, जनजातीय मेलों और ट्राइफेड के प्रमुख ‘ट्राईब्स इंडिया’ (Tribes India) बिक्री केंद्रों के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने का सुनहरा अवसर मिलेगा। इससे न केवल बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी, बल्कि कारीगरों की आय और आजीविका के अवसरों में भी सीधी बढ़ोतरी होगी।

          ​मेले में दिखेगी छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा की झलक

          इस सूचीबद्धता मेले में पारंपरिक कला और आधुनिक बाजार की प्राथमिकताओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मेले में विभिन्न श्रेणियों के उत्कृष्ट उत्पाद प्रदर्शित और सूचीबद्ध किए जाएँगे। जिसमें पारंपरिक वस्त्र, धातु शिल्प (ढोकरा/बेल मेटल), मिट्टी शिल्प, तथा बाँस एवं बेंत से निर्मित कलाकृतियाँ शामिल है। इसी तरह ​सांस्कृतिक धरोहर व आभूषण में जनजातीय आभूषण,पारंपरिक चित्रकला, हस्तनिर्मित उपहार और दैनिक उपयोग के उत्पाद के साथ साथ ​प्राकृतिक एवं जैविक उत्पाद में शुद्ध जैविक खाद्य सामग्रियां, जड़ी-बूटियां और वनोपज पर आधारित प्रसंस्कृत उत्पाद शामिल है।

          ​मेले के महत्व को रेखांकित करते हुए कलेक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन जनजातीय विकास को केवल सीमित कल्याणकारी योजनाओं के चश्मे से नहीं देख रहा, बल्कि इसे कौशल विकास, आजीविका, उद्यमिता और व्यापक बाजार से जोड़कर एक समग्र स्वरूप दे रहा है। ट्राइफेड के साथ यह रणनीतिक साझेदारी स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाकर कारीगरों के हुनर को स्थायी आर्थिक शक्ति में बदलने का काम करेगी। ​वहीं, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत ने कहा कि धमतरी के जनजातीय क्षेत्रों में शिल्प और स्थानीय संसाधनों का अतुलनीय भंडार है। इन उत्पादों को ब्रांडिंग और राष्ट्रीय बाजार की मांग से जोड़ना जनजातीय आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

          इस मेले में शामिल होने के लिए प्रतिभागी अपने उत्कृष्ट उत्पादों के नमूनों (Samples) के साथ आधार कार्ड एवं जाति प्रमाण-पत्र,​संस्थागत प्रमाण-पत्र (यदि उपलब्ध हों) जैसे उद्यम पंजीयन, किसान उत्पादक संगठन (FPO) पंजीयन, संस्था/सोसायटी पंजीयन, एवं FSSAI प्रमाण-पत्र के साथ ​उपस्थित होका स्थल पर ही पंजीयन कर सकते है। जिन कारीगरों के पास व्यावसायिक पंजीयन नहीं है, उनके लिए मेले के दौरान आयोजन स्थल पर ही उद्यम पंजीयन की तत्काल सुविधा और विशेषज्ञ व्यावसायिक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा।



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