मॉस्को: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। मॉस्को में सोमवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद जताई।
दोनों नेताओं ने भारत-रूस के रिश्तों और आपसी सहयोग को लेकर भी चर्चा की। जयशंकर रविवार को मॉस्को पहुंचे थे। वह रूस के अपने दो दिन के दौरे पर हैं।
जयशंकर ने पुतिन से कहा कि पीएम मोदी BRICS समिट के लिए पुतिन का भारत में स्वागत करेंगे। दोनों नेताओं की सालाना बैठक भी जल्द होगी। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी किर्गिजस्तान में होने वाली SCO समिट में उनसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संबोधित करते हुए कहा, ‘आपकी आज की यात्रा रूस-भारत के बीच दशकों से कायम रिश्तों की मजबूती को दिखाती है।’
पुतिन बोले- दोनो देशों के बीच इस साल कारोबार बढ़ा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि इस साल रूस और भारत के बीच कारोबार बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच दशकों से मजबूत रिश्ते बने हुए हैं। दोनों देश व्यावहारिक तौर पर लगभग सभी क्षेत्रों में अपना सहयोग जारी रखे हुए हैं।
उन्होंने कहा,
मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस साल हमारा कारोबार बढ़ा है। पिछले साल इसमें थोड़ी कमी आई थी, लेकिन इस साल यह बढ़ रहा है।
जयशंकर रूसी उपप्रधानमंत्री से भी मिले
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर भी बात हुई।
भारत और रूस कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। जयशंकर ने मंटुरोव के साथ बातचीत में कहा कि भारत-रूस साझेदारी ने लगातार बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को मजबूत और बेहतर तरीके से ढाला है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में मुश्किल हालात के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते लगातार गहरे हुए हैं। यह दोनों देशों के बीच आपसी हित और भरोसे को दिखाता है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव हाथ मिलाते हुए।
2022 से भारत-रूस व्यापार बढ़ा
रूस और भारत के बीच कारोबार 2022 के बाद तेजी से बढ़ा है, जिसकी बड़ी वजह भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ना है। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह कारोबार पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से करीब 13% घटा था।
- वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कारोबार रिकॉर्ड 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 में यह घटकर करीब 59.9 अरब डॉलर रह गया, यानी पिछले साल के मुकाबले करीब 13% की कमी आई।
- दोनों देशों के बीच कारोबार में सबसे बड़ा हिस्सा रूस से भारत को होने वाले तेल निर्यात का है। इसके अलावा रूस से भारत खाद, कोयला और दूसरे कच्चे माल खरीदता है।
- हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार में अभी भी बड़ा असंतुलन है। भारत रूस से जितना सामान खरीदता है, उसके मुकाबले रूस को भारत का निर्यात काफी कम है।
- दोनों देशों ने 2030 तक आपसी कारोबार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए भारत खास तौर पर रूस को अपनी दवाइयों, कृषि उत्पादों, मशीनरी और दूसरे सामानों की बिक्री बढ़ाना चाहता है।
भारत ने जुलाई में आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा
भारत ने जुलाई 2026 में रूस से रिकॉर्ड 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 50.83% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया।
रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। जुलाई 2025 के मुकाबले जुलाई 2026 में रूस से भारत का तेल आयात 62.4% बढ़ा। हालांकि, जून 2026 में हुए रिकॉर्ड 26 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले जुलाई में तेल आयात 4.8% कम रहा।

(Bureau Chief, Korba)






