KORBA : सेवा की कहानी : स्वरोजगार के सपनों को मिला सरकारी संबल, फालगूनी डे मेहनत से बदली परिवार की आर्थिक तस्वीर

        ऋण और सब्सिडी ने खोला स्वरोजगार का रास्ता, फालगूनी डे की मेहनत से संवर रहा परिवारत्र

        कोरबा (BCC NEWS 24): स्वरोजगार केवल आमदनी का जरिया नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने का माध्यम भी है। इसी सोच को साकार करने में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम  जैसे योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस योजना के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित करने के इच्छुक लोगों को बैंक ऋण और सब्सिडी के जरिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाता है, ताकि वे अपने हुनर और मेहनत को व्यवसाय का रूप देकर आय का स्थायी साधन बना सकें।   कोरबा के राताखार निवासी श्रीमती फालगूनी डे ने भी सरकारी सहयोग से मिले इस अवसर को अपनी मेहनत और लगन से आजीविका के मजबूत साधन में बदल दिया है। फालगूनी डे के लिए मैरिज हॉल डेकोरेशन का व्यवसाय आज परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन चुका है। योजना से जुड़ने से पहले परिवार के आठ सदस्यों का जीवन सीमित आमदनी में चल रहा था। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद भविष्य के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत करना चुनौतीपूर्ण था। अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छा थी, लेकिन पूंजी की कमी के कारण यह सपना आगे नहीं बढ़ पा रहा था। ऐसे समय में जागरूकता शिविर फालगूनी के लिए नई संभावना लेकर आया। शिविर में उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिली। स्वरोजगार के लिए योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता के बारे में जानने के बाद उन्होंने इस अवसर का लाभ उठाने का निर्णय लिया। फालगूनी ने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के माध्यम से मैरिज हॉल डेकोरेशन व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवेदन किया।

        आवेदन प्रक्रिया के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा से 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। योजना के तहत उन्हें 35 प्रतिशत यानी 3.50 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ मिल रहा है, जबकि शेष ऋण राशि का भुगतान बैंक को निर्धारित किश्तों में किया जा रहा है। आर्थिक संसाधन उपलब्ध होने के बाद फालगूनी ने अपने व्यवसाय की शुरुआत की और धीरे-धीरे काम को विस्तार देना शुरू किया। फालगूनी अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती हैं, “जागरूकता शिविर में योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद मुझे अपने व्यवसाय का सपना पूरा करने का रास्ता दिखाई दिया। मैंने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र में आवेदन किया। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद मैरिज हॉल डेकोरेशन का काम शुरू कर सकी। आर्थिक सहायता मिलने से व्यवसाय खड़ा करने में काफी मदद मिली।”

        विवाह समारोहों में सजावट के काम के साथ अब फालगूनी को अन्य सामाजिक आयोजनों में भी काम मिल रहा है। ग्राहकों का दायरा बढ़ने के साथ व्यवसाय में निरंतरता आई और उनकी कमाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 18 हजार रुपये प्रतिमाह से शुरू हुई आय अब बढ़कर करीब 40 हजार  प्रति कार्यक्रम हो गई है। बढ़ी हुई आमदनी ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुदृढ़ किया है। फालगूनी बताती हैं, “पहले आय सीमित होने के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत सोच-समझकर खर्च करना पड़ता था। अब काम बढ़ा है तो आमदनी भी बढ़ी है। विवाह के अलावा दूसरे सामाजिक कार्यक्रमों में भी डेकोरेशन का काम मिल जाता है। इससे परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और आगे के लिए भी कुछ बेहतर करने का भरोसा बढ़ा है।”

        आमदनी में हुए इस बदलाव का असर परिवार के सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। पहले जहां आर्थिक संसाधन सीमित थे, वहीं अब नियमित आय के कारण जरूरी खर्चों को पूरा करने में सुविधा हो रही है। परिवार की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है और फालगूनी स्वयं को पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय का संचालन करते हुए देख रही हैं। अपने काम के जरिए वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे पा रही हैं। उनका कहना है, “सरकार की योजना से मुझे सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं मिली, बल्कि अपना काम करने का अवसर मिला। आज मैं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर पा रही हूं। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की इच्छा है, ताकि आने वाले समय में और बेहतर आमदनी हो सके।”

        फालगूनी के लिए सरकारी योजना से मिला सहयोग और स्वयं की मेहनत मिलकर बदलाव का माध्यम बना है। ऋण और सब्सिडी से व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी आर्थिक आधार मिला, जबकि निरंतर प्रयास से उन्होंने उसे आय के स्थायी स्रोत में विकसित किया। आज बढ़ी हुई कमाई से परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वह अपने व्यवसाय के विस्तार की संभावनाओं पर भी काम कर रही हैं। अपने अनुभव के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए फालगूनी डे कहती हैं, “प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। सरकार की योजनाओं से हम जैसे लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने में सहायता मिलती है। मैं  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी  और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देती हूं। योजना से मिले सहयोग और अपनी मेहनत से आज मैं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हूं।”



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