विशेष लेख: स्वच्छता दीदीयां काम करती हैं तब शहर स्वच्छ है…

              सारंगढ़-बिलाईगढ़: ‘‘स्वच्छ भारत मिशन: एक कदम स्वच्छता की ओर’’ और ‘‘स्वच्छ छत्तीसगढ: मिशन क्लीन सिटी़’’ वाक्य को स्वच्छता दीदियों ने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। यूं रोजमर्रा की जिंदगी में आम लोग कहां कुछ कर पाते हैं। अपना घर-गलियां ठीक ढंग ने साफ नहीं करते मगर स्वच्छता दीदियां रोज आती हैं शहर की गलियों में, चाहे धूप हो या बरसात हो। राज्य सरकार स्वच्छता दीदियों को सम्मान के रूप में पारिश्रमिक 6000 रूपये प्रतिमाह दे रही हैं। अच्छी बात है कि इस मानदेय पर स्वच्छता दीदीयां खुश हैं। खुशी-खुशी काम कर रही हैं। स्वच्छता दीदियों की इच्छा शक्ति-हौसला ही मुख्य है, जो रोज शहर को साफ करने के लिए तैयार रहती है और गंदगी को भगा देती हैं। सुबह 8 बजे से दोपहर तक भोजन अवकाश के बाद फिर शाम 4 बजे तक ये लगातार सफाई काम करती हैं। सूखा और गीला कचरा, प्लास्टिक वस्तुएं, कई प्रकार के कचरा को खुशी से निडर होकर योद्धा की तरह साफ करती हैं। झाडू, ई-रिक्शा, ट्रायसायकल स्वच्छता दीदियों के सहायक हैं। मणि कंचन केन्द्र में कचरे का पृथक्करण, पैकेजिंग फिर रिसायकल के लिए फैक्ट्री आदि को भेजना और छत्तीसगढ़ सरकार के नरवा गरूवा घुरवा बारी कार्यक्रम अंतर्गत जैविक खाद निर्माण करना इनके दैनिक कार्यों में शामिल है। नगरपालिका परिषद सांरगढ़ अंतर्गत संचालित मणिकंचन केन्द्र सारंगढ़ में कार्यरत स्वच्छता दीदी संध्या साहनी और धनमती साहनी ने कहा कि हम ये कार्य अपनी फर्ज समझकर खुशी-खुशी करते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि हमें रोजगार दिया इसके लिए राज्य सरकार के हम आभारी हैं। उन्होंने हमें ऐसे सफ़ाई सेवा देने के लिए अवसर प्रदान किया।

              समाज, शहर को स्वच्छ रखने की सोचती है और स्वच्छता दीदियां शहर को रोज साफ करती हैं। कथनी और करनी के अन्तर को मिटाने वाली जो शक्ति है वो स्वच्छता दीदियों के बाजूओं में है। छत्तीसगढ़ सरकार और जिम्मेदार नागरिकगण इन स्वच्छता दीदियों का सम्मान करती है। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये स्वच्छता दीदियां अपने माटी, मातृभूमि, शहर, राज्य और देश को स्वच्छ रखने के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक सेवा करती हैं। अंबिकापुर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल को भारत सरकार द्वारा बेस्ट प्रेक्टिस के रूप में सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस मॉडल को राज्य के 165 नगरीय निकायों में मिशन क्लीन सिटी  (एमसीसी) : स्वच्छ छत्तीसगढ़ के रूप में लागू किया गया है।

              स्वच्छता दीदियों के कार्यों ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर कई वर्षों तक लगातार प्रथम पुरस्कार दिलाया है। इनमें राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की रैकिंग में पहला स्थान पाने पर छत्तीसगढ़ को देश का सबसे स्वच्छ राज्य का सम्मान मिला। राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की रैकिंग में छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर शहर को देशभर में दूसरा और भिलाई नगर को 11वां स्थान मिला। स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में छत्तीसगढ़ ने देश के स्वच्छतम राज्य होने का दर्जा प्राप्त किया। नवम्बर 2021 में छत्तीसगढ़ को स्वच्छ अमृत महोत्सव कार्यक्रम में सबसे स्वच्छ राज्य श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। इस सम्मान समारोह में प्रदेश के सर्वाधिक 67 नगरीय निकायों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिये गए। सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज-2021 श्रेणी में छत्तीसगढ़ ने बेस्ट स्टेट का अवार्ड जीता है। स्वच्छ भारत अभियान के लिए छत्तीसगढ़ के राजधानी में  गूंजती गीत “आओ रे आओ रे… मोर रायपुर” ने प्रसिद्धि पाकर अपना कीर्तिमान बनाया है। इस गीत को दिव्यांग बालिकाओं ने गाया है और बॉलीवुड गायक जावेद अली ने भी गाया है।


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