Monday, February 16, 2026

              आंध्र प्रदेश: फिर विवादों में घिरा तिरूपति मंदिर, लड्डू के बाद दुपट्टा में घोटाला उजागर, सिल्क बताकर ₹350 के पॉलिएस्टर दुपट्टे ₹1300 में बेचे; 10 साल में ₹54 करोड़ का स्कैम

              तिरुपति: आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित तिरुमला के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में लड्डू के बाद प्रसाद के तौर पर दिए जाने वाले दुपट्टे (अंगवस्त्रम) की बिक्री में घोटाला सामने आया है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक कॉन्ट्रैक्टर ने शुद्ध मुलबेरी सिल्क दुपट्टों की जगह लगातार 100% पॉलिएस्टर दुपट्टे सप्लाई किए।

              बिलिंग सिल्क दुपट्टों के नाम पर ही की गई। एक पॉलिएस्टर दुपट्टे की वास्तविक कीमत लगभग ₹350 थी। लेकिन, तिरुमला मंदिर का प्रबंधन करने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) को वही ₹350 का दुपट्टा ₹1,300 में बेचा गया।

              ये घोटाला साल 2015 से 2025, यानी पिछले 10 साल से चल रहा था। इस दौरान TTD ने कॉन्ट्रैक्टर को लगभग 54 करोड़ भुगतान किए। TTD बोर्ड ने चेयरमैन बी.आर. नायडू के निर्देश पर एक इंटरनल जांच शुरू की गई थी, जिसके बाद पूरा मामला सामने आया।

              2019 में PM मोदी तिरुपति मंदिर गए थे। TTD बोर्ड की तरफ से उन्हें सिल्क दुपट्टा और प्राचीन सिक्कों पर श्राइन बोर्ड की ओर से प्रकाशित दो किताबें भेंट की थी।

              2019 में PM मोदी तिरुपति मंदिर गए थे। TTD बोर्ड की तरफ से उन्हें सिल्क दुपट्टा और प्राचीन सिक्कों पर श्राइन बोर्ड की ओर से प्रकाशित दो किताबें भेंट की थी।

              दो लैब में दुपट्टों का साइंटिफिक टेस्ट कराया गया था

              नायडू के अनुसार, मंदिर में दान देने वाले बड़े दानकर्ता को प्रसाद के तौर पर सिल्क दुपट्टा ओढ़ाया जाता है। इसके अलावा वेदाशीर्वचनम् जैसे पूजा-अनुष्ठानों में सिल्क दुपट्टे इस्तेमाल होते हैं। उनमें भी सस्ता पॉलिएस्टर इस्तेमाल किया गया।

              नायडू ने कहा कि दुपट्टों के सैंपल साइंटिफिक टेस्ट के लिए दो लैब्स में भेजे गए थे, जिनमें से एक लैब केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) के तहत है। दोनों रिपोर्टों में दुपट्टे का कपड़ा पॉलिएस्टर निकला। दुपट्टों पर असली सिल्क की पुष्टि करने वाला ‘सिल्क होलोग्राम’ भी नहीं मिला, जो लगाना कंपलसरी थी।

              नायडू ने बताया कि एक ही कंपनी और उससे जुड़ी इकाइयां पिछले 10 साल से TTD को दुपट्टा सप्लाई कर रही थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद TTD ट्रस्ट बोर्ड ने कंपनी की सभी मौजूदा टेंडर रद्द कर दिए हैं और पूरे मामले को राज्य एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को जांच के लिए सौंप दिया है।

              68 लाख किलो मिलावटी घी से ₹250 करोड़ का घोटाला हुआ

              सितंबर 2024 में तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसादम में मिलावटी घी का मामला सामने आया था। जांच में पता चला कि 2019 से 2024 के बीच लड्डू बनाने में लगभग 68 लाख किलो मिलावटी घी इस्तेमाल हुआ। घी सप्लाई करने वाली कंपनी ने मिलावटी घी से लगभग ₹250 करोड़ कमाए थे।

              सीबीआई और आंध्र प्रदेश फूड सेफ्टी विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कंपनी के डेयरी वाले सभी डॉक्यूमेंट्स फर्जी हैं। इस कंपनी ने कभी भी न दूध खरीदा और न कभी मक्खन खरीदा फिर भी ये घी-मक्खन सप्लाई करती रही।

              कंपनी के मालिक पम्मिल जैन और विपिन जैन ने घी प्रोडक्शन की फर्जी यूनिट बनाई थी। TTD ने 2022 में शिकायतों के बाद भोले बाबा डेयरी को ब्लैकलिस्ट किया था। बाद में इसी ग्रुप ने दूसरी कंपनियों बनाईं और मंदिर में घी-मक्खन की सप्लाई जारी रही। इनमें वैष्णवी डेयरी (तिरुपति), माल गंगा डेयरी (उत्तर प्रदेश) और AR डेयरी फूड्स (तमिलनाडु) शामिल हैं।

              घी में जानवरों की चर्बी की मिलावट

              CBI और FSSAI की जांच में पता चला कि घी में जानवरों की चर्बी मिलाई गई थी। जुलाई 2024 में TTD ने AR डेयरी की चार टैंकर घी की खेप रिजेक्ट की, लेकिन ये टैंकर वापस लौटाने के बजाय वैष्णवी डेयरी के नाम पर ट्रांसफर कर दिए गए।

              गुजरात की एक लैब की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि AR डेयरी के घी में मछली का तेल, बीफ टैलो और लार्ड मिलाया गया था। हालांकि लैब ने ‘फॉल्स पॉजिटिव’ का डिस्क्लेमर भी जोड़ा था।

              मामले में गिरफ्तार एक आरोपी अजय कुमार सुगंध ने भी पूछताछ में माना कि वह मोनोडिग्लिसराइड्स और एसेटिक एसिड एस्टर जैसे केमिकल सप्लाई करता था, जो मिलावटी घी बनाने में इस्तेमाल होते हैं।

              घोटाले में हवाला और राजनीतिक आरोपों की जांच

              जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ₹50 लाख की राशि छुपा कर ट्रांसफर की गई। ये राशि YSR कांग्रेस के सांसद व पूर्व TTD अध्यक्ष वाईभी सुभा रेड्डी के निजी सहायक के चिन्नप्पन्ना को दी गई।

              दिल्ली में दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन में ₹20 लाख एजेंट अमन गुप्ता से और बाकी राशि प्रीमियर एग्री फूड्स के अधिकारी विजय गुप्ता से मिली थी।

              पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का दावा है कि जानवरों के चर्बी वाला घी पिछली सरकार (YSR कांग्रेस) के समय लड्डू में इस्तेमाल हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया जिसने स्पष्ट किया कि राजनीति और धर्म को मिलाना गलत है। कोर्ट ने जांच के लिए CBI, राज्य पुलिस और फूड सेफ्टी विभाग की संयुक्त टीम बनाने का आदेश दिया।


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