Sunday, February 15, 2026

              चादर, कंबल, तकिया, कवर और फेस टॉवेल चोरी… बिलासपुर-दुर्ग स्टेशन से छूटने वाली ट्रेनों से चार महीने में 55 लाख से अधिक का सामान चोरी

              BILASPUR: बिलासपुर जोन के बिलासपुर और दुर्ग डिपो से छूटने वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के एसी कोच में यात्रियों को दिए जाने वाले कंबल, चादर, पिलोकवर, फेश टॉवेल की लगातार चोरी हो रही है। इस मामले में रेलवे प्रशासन हर महीने लाखों रुपए की पेनाल्टी ठेका कंपनी पर कर रहा है। पिछले चार महीने में लगभग 55 लाख 97 हजार 406 रुपए के सामान की चाेरी हुई है।

              रेलवे मूल दर से लगभग 75 फीसदी दर के हिसाब से 41 लाख 97 हजार 846 रुपए की पेनाल्टी तय की गई है। रेलवे ने ट्रेनों में एसी अटेंडेंट का काम ठेके पर दे दिया है। ठेका कंपनी को हर गाड़ी के लिए कंबल, चादर, तकिया, फेस टॉवेल, पिलो, पिलो कवर और बॉथ टॉवेल गिनती करके दिए जाते हैं। और वापस आने पर गिनती करके लिए जाते हैं।

              वापसी में जितने भी सामान कम होते हैं उसका रिकाॅर्ड रखा जाता है। कंपनी कर्मचारी के समक्ष ही ये किया जाता है और उसे अवगत कराया जाता है। चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं लेकिन जब से एसी कोच में अटेंडर का काम निजी ठेके पर दिया है तब से चोरियां बढ़ी हैं। पहले जब रेलवे प्रशासन के जिम्मे यह काम था तब कभी कभार ही चीजें चोरी होती थी।

              और जिसकी ड्यूटी के दौरान ये चोरी होते थे उनसे इनकी वसूली की जाती थी। चूंकि वे रेलवे के कर्मचारी होते थे इसलिए काम को गंभीरता से करते थे। अब चूंकि यह काम ठेका कंपनी कर रही है तो वहां मनमानी चल रही है। हर ट्रेन के पांच या छह कोच के लिए चार या उससे भी कम कर्मचारी लगाए जा रहे हैं।

              इतना ही नहीं जो कर्मचारी यात्रियों को चादर, तकिया, कंबल, नेपकिन देता है उसी जिम्मे कोच की साफ सफाई भी होती है। ऐसे में सभी कोच में एक साथ नजर रख पाना संभव नहीं हो रहा है और चादर, कंबल तकिया और तकिया कवर चोरी हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि बिलासपुर कोचिंग डिपो की ट्रेनों में अटेंडेंट का ठेका कोलकाता की कंपनी और दुर्ग डिपो का ठेका रतलाम की कंपनी को दिया गया है।

              सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ और नर्मदा एक्सप्रेस में चोरियां
              बिलासपुर जोन की छत्तीसगढ़ और नर्मदा एक्सप्रेस के एसी कोच में सर्वाधिक चोरिया हो रही है। इनमें छत्तीसगढ़ की पांच रैक है इसमें सभी में चादर, तकिया, कंबल, नेपकिन की सप्लाई होती है। इसी में ज्यादा चोरी होती है। क्योंकि ये ट्रेनें गंतव्य तक पहुंचने में 36 घंटे से भी ज्यादा का समय लेती हैं।

              इसलिए हो रही हैं चोरी
              कोच अटेंडेंट के काम का ठेका लेने वाली कंपनी को हर ट्रेन में हर कोच के हिसाब से अटेंडेंट रखना है, लेकिन यहां मिलीभगत करके कभी 4 तो कभी 5 अटेंडेंट ही ट्रेन में जाते हैं। जबकि किसी ट्रेन में 8 तो किसी में 10 एसी कोच होते हैं, इसलिए एक के जिम्मे में दो कोच आते हैं जिसकी देखभाल वे नहीं कर पाते हैं। सफर के दौरान आधी-आधी रात को यात्री अपने स्टेशनों में उतर जाते हैं। उस समय कोई अटेंडर नहीं होता है। रेलवे अफसरों को समय-समय पर इसकी जांच की जानी चाहिए लेकिन वे तो सिर्फ पेनाल्टी करके पैसा वसूलने में ही संतुष्ट हो रहे हैं। जबकि व्यवस्था सुधारने की ओर कदम उठाना चाहिए।

              नियमानुसार ठेकेदार से वसूली होती है
              “ट्रेनों के एसी कोच में ठेका कंपनियों को ट्रेन रवाना होने से पहले गिनती करके चीजें दी जाती है और वापस गिनती कर ली जाती है। जाे भी कम होती है, उसकी वसूली ठेका कंपनी से की जाती है।” -संतोष कुमार, सीनियर पीआरओ, एसईसीआर बिलासपुर


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