प्योंगयांग: नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने को लेकर खुशी जताई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए हमले साबित करते हैं, कि उनके देश का परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था।
किम ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने यह बयान सोमवार को संसद में लंबे भाषण के दौरान दिया।
अपने भाषण में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख दोहराया और कहा कि वह अपने देश की परमाणु ताकत को और मजबूत करेंगे, ताकि अमेरिका को रोका जा सके।

किम जोंग उन की यह तस्वीर नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने जारी की है। इसमें वह सोमवार को सुप्रीम पीपल्स असेंबली में कार्यक्रम में नजर आ रहे हैं।
किम जोंग बोले- और ज्यादा परमाणु हथियार बनाएंगे
किम जोंग उन का यह भाषण मंगलवार को लिखित रूप में जारी हुआ है। इसमें उन्होंने कहा कि 2019 में ट्रम्प के साथ बातचीत टूटने के बाद परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला उनका सबसे सही कदम था।
किम ने कहा कि नॉर्थ कोरिया अब अमेरिका के खिलाफ एकजुट मोर्चे में और ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएगा। हालांकि उन्होंने ट्रम्प का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि उनके विरोधी टकराव चाहते हैं या शांति, यह उन पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि नॉर्थ कोरिया हर स्थिति के लिए तैयार है।
किम ने देश को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने, ज्यादा परमाणु हथियार और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलें बनाने पर जोर दिया। किम ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों की वजह से नॉर्थ कोरिया अब ज्यादा सुरक्षित है और इसी वजह से वह अपने संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक विकास के लिए भी कर पा रहा है।

किम जोंग उन एक लॉन्चर पर रखी ह्वासोंग-17 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के पास चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर 24 मार्च 2022 की है।
किम जोंग उन के भाषण की अहम बातें…
- अमेरिका दुनियाभर में जो आक्रामक कदम उठा रहा है, उससे साफ होता है कि उनका परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला गलत नहीं है।
- आज की स्थिति साफ दिखाती है कि दुश्मनों की बातों में न आकर परमाणु हथियार सुरक्षित रखने का फैसला भी सही था।
- नॉर्थ कोरिया को अब कोई भी खतरा नहीं है। जरूरत पड़ी तो हम दूसरे देशों के लिए खतरा बन सकते हैं।
- किसी देश की प्रतिष्ठा, हित और जीत सिर्फ सबसे मजबूत ताकत से ही तय होती है। हम अपने देश को एक परमाणु शक्ति के रूप में और मजबूत करते रहेंगे।

नॉर्थ कोरिया ने दिसंबर 2023 में एक अज्ञात जगह से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को लॉन्च किया था।
साउथ कोरिया को दुश्मन देश का दर्जा देंगे किम
साउथ कोरिया को लेकर उन्होंने कहा कि हम उसे सबसे बड़ा दुश्मन मानेंगे और पूरी तरह नजरअंदाज करेंगे। अगर साउथ कोरिया कोई भी कदम उठाता है जो उनके देश को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी।
कई दशकों से अमेरिका और उसके सहयोगी देश, प्रतिबंध और बातचीत के जरिए नॉर्थ कोरिया को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन अब तक सभी प्रयास असफल रहे हैं।
व्हाइट हाउस में दोबारा आने के बाद ट्रम्प ने किम से फिर बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, किम का कहना है कि बातचीत तभी हो सकती है, जब अमेरिका आधिकारिक तौर पर नॉर्थ कोरिया को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दे।
नॉर्थ कोरिया लंबे समय से यह कहता रहा है कि अगर लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन के पास परमाणु हथियार होते तो उनका अंत इस तरह नहीं होता।
2019 में अमेरिका-नॉर्थ कोरिया की बातचीत टूटी थी
अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर साल 2018 में बातचीत शुरू हुई थी। इसे लेकर जून 2018 में सिंगापुर में पहली बार ट्रम्प और किम जोंग उन की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी।
इसके बाद फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी बैठक हुई, लेकिन यहीं बातचीत टूट गई, क्योंकि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत नहीं हो पाए।
इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने कहा था कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सुरक्षा के लिए उसे अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी होगी।
इसी सोच के तहत उसने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। नॉर्थ कोरिया का मानना है कि मजबूत परमाणु क्षमता ही उसे बाहरी हमलों से बचा सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने जून 2019 को नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन से नॉर्थ और साउथ कोरिया की सीमा पर स्थित DMZ (डिमिलिटराइज्ड जोन) में मुलाकात की थी।
नॉर्थ कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं
इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने धीरे-धीरे अपनी पुरानी रणनीति पर वापसी कर ली। उसने मिसाइल टेस्टिंग बढ़ा दी और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने लगा। कई बार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का भी परीक्षण किया गया।
फिलहाल नॉर्थ कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया के पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और और लंबी दूरी (ICBM) की मिसाइलें शामिल हैं।
ICBM यानी लंबी दूरी की मिसाइलें ऐसी हैं, जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। नॉर्थ कोरिया ने ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलों की टेस्टिंग की है। इन मिसाइलों की रेंज लगभग 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक मानी जाती है।
इसका मतलब है कि ये अमेरिका के बड़े हिस्से तक पहुंच सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स यह भी मानती हैं कि नॉर्थ कोरिया के पास करीब 50–100 के आसपास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हो सकती हैं, लेकिन यह पक्का आंकड़ा नहीं है।

(Bureau Chief, Korba)




