Saturday, February 24, 2024
Homeछत्तीसगढ़कोरबाBIG NEWS: जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का फैसला बरकरार... सुप्रीम कोर्ट ने...

BIG NEWS: जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का फैसला बरकरार… सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आर्टिकल 370 अस्थायी था; सरकार के हर फैसले को चुनौती नहीं दे सकते

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का फैसला बरकार रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। CJI चंद्रचूड़ ने कहा – आर्टिकल 370 एक अस्थायी प्रावधान था। संविधान के अनुच्छेद 1 और 370 से स्पष्ट है कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।

CJI ने कहा कि केंद्र की तरफ से लिए गए हर फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसा करने से अराजकता फैल जाएगी। अगर केंद्र के फैसले से किसी तरह की मुश्किल खड़ी हो रही हो, तभी इसे चुनौती दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की यह दलील खारिज कर दी कि राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र ऐसा कोई फैसला नहीं ले सकता, जिसमें बदलाव न किया जा सके।

चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि आर्टिकल 356 के बाद केंद्र केवल संसद के द्वारा कानून ही बना सकता है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। CJI ने बताया कि फैसले में 3 जजों के जजमेंट हैं। एक फैसला चीफ जस्टिस, जस्टिस गवई और जस्टिस सूर्यकांत का है। दूसरा फैसला जस्टिस कौल का है। जस्टिस खन्ना दोनों फैसलों से सहमत हैं।

केंद्र ने 5 अगस्त 2019 को 370 हटाया, इसके खिलाफ 23 याचिकाएं
मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 खत्म कर दिया था। साथ ही राज्य को 2 हिस्सों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 23 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। पांच जजों की बेंच ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की थी।

सुप्रीम कोर्ट में लगातार 16 दिन तक चली सुनवाई 5 सितंबर को खत्म हुई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। यानी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के 96 दिन बाद केस पर फैसला सुनाया।

आर्टिकल 370 पर फैसला आने से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।

आर्टिकल 370 पर फैसला आने से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।

कोर्ट रूम अपडेट्स:
सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की संविधान पीठ में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस कौल और जस्टिस खन्ना शामिल हैं। सभी जजों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया। फैसला सिर्फ CJI चंद्रचूड़ ने पढ़ा।

CJI ने कहा….

  • प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन वैध था या नहीं, इस पर हम विचार ही नहीं कर रहे हैं क्योंकि इसे किसी ने चुनौती नहीं दी थी।
  • राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र की ओर से लिए गए हर फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • जम्मू-कश्मीर के पास देश के अन्य राज्यों से अलग कोई आंतरिक संप्रभुता ( Internal Sovereignty) नहीं है।
  • संविधान का आर्टिकल 370 अस्थायी था, इसे रद्द करने की राष्ट्रपति की शक्ति अभी भी मौजूद है। जम्मू-कश्मीर युद्ध की स्थिति के कारण अंतरिम तौर पर इसे लाया गया था।
  • जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा को कभी भी परमानेंट बॉडी बनने का इरादा नहीं था। जब जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का अस्तित्व खत्म हो गया तो जिस विशेष शर्त के लिए आर्टिकल 370 लागू किया गया था, उसका भी अस्तित्व खत्म हो गया।
  • जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश भारत के राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं थी।
  • सुप्रीम कोर्ट को जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति की उद्घोषणा की वैधता पर फैसला देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनौती नहीं दी।
  • चीफ जस्टिस ने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने जब भारत में शामिल हुआ तो उसकी संप्रभुता नहीं रह जाती है।

किसने किस पक्ष की तरफ से पैरवी की
सरकार की तरफ से- अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ वकील हरीष साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी गिरि।
याचिकाकर्ताओं की तरफ से- कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव धवन, जफर शाह और दुष्यंत दवे।

  • Krishna Baloon
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular