अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) US-ईरान जंग में सीधे तौर पर शामिल होने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा हैं।
इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खोलने के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा रही है। इसके तहत हार्मुज सिक्योरिटी फोर्स बनाई जाएगी, जो जहाजों की सुरक्षा तय करेगी।
होर्मुज एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इसे बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। UAE पहला खाड़ी देश बन सकता है जो इस जंग में सीधे हिस्सा लेगा।
हाल में ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज किए हैं। अब तक करीब 2500 हमले हुए हैं, जिनमें एयरपोर्ट, रिहायशी इमारत और ऑयल फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा है।
UAE दूसरे देशों से गठबंधन बनाने की मांग कर रहा
UAE अमेरिका, यूरोप और एशिया से अपील कर रहा है कि वे गठबंधन बनाकर स्ट्रेट को सुरक्षित करें।
UAE अधिकारी ने WSJ को बताया कि ईरान अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहा है, इसलिए वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने को तैयार है।
UAE का मानना है कि अगर UNSC से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाए तो वर्तमान में झिझक रहे एशियाई और यूरोपीय देश भी हार्मुज को खुलवाने में मदद करने के लिए आगे आ सकते हैं।
रूस और चीन UAE के प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और चीन इस प्रस्ताव को वीटो (रोक) कर सकते हैं। रिपोर्ट में खाड़ी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भले ही प्रस्ताव पास न हो, UAE फिर भी सैन्य प्रयासों में समर्थन देने के लिए तैयार है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से UAE की तेल आपूर्ति, शिपिंग और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यह इसे अपनी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानता है।
UAE माइंस हटाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और अमेरिकी नेतृत्व वाले ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है। उसके पास जेबेल अली पोर्ट, एयरबेस और आधुनिक फाइटर जेट जैसे संसाधन मौजूद हैं।
UAE ने अमेरिका से यह सुझाव भी दिया है कि वह हार्मुज में स्थित द्वीपों, खासकर अबू मूसा द्वीप पर कब्जा कर ले। ईरान पिछले लगभग पांच दशकों से इस द्वीप पर कब्जा किए हुए है, लेकिन UAE इसे अपना बताता है।
होर्मुज स्ट्रेट के पास 3 द्वीपों को लेकर विवाद
फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पास 3 द्वीप हैं जिन्हें लेकर विवाद है। ये तीनों द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाते हैं। इन्हें लेकर ईरान और UAE के बीच विवाद है।
1. अबू मूसा
यह तीनों में सबसे अहम और बड़ा द्वीप है। 1971 में ईरान और शारजाह (UAE का अमीरात) के बीच एक समझौता (MoU) हुआ था। इसके तहत दोनों ने प्रशासनिक व्यवस्था साझा करने की बात की थी। बाद में ईरान ने यहां अपनी पकड़ मजबूत कर ली। UAE का आरोप है कि ईरान ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया।
2. ग्रेटर टुंब
यह द्वीप रस अल खैमा अमीरात के नजदीक है। 1971 में ब्रिटिश सेना के हटने के ठीक बाद ईरान ने इस पर कब्जा कर लिया था। कब्जे के दौरान वहां मौजूद स्थानीय अरब पुलिस बल के साथ झड़प भी हुई थी। UAE का दावा है कि यह द्वीप ऐतिहासिक रूप से उसका हिस्सा था। यहां कोई बड़ी आबादी नहीं है, लेकिन ईरान ने इसे सैन्य चौकी के रूप में विकसित किया है।
3. लेसर टुंब
यह ग्रेटर टुंब के पास ही स्थित छोटा द्वीप है। इस पर भी 1971 में ईरान ने कंट्रोल हासिल कर लिया था। यहां कोई स्थायी आबादी नहीं है लेकिन रणनीतिक रूप से यह भी उतना ही अहम है क्योंकि यह समुद्री मार्ग के बहुत करीब है।
UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर बैन लगाया
UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया भर में इस बात पर सहमति है कि होर्मुज में जहाजों को आने-जाने की आजादी होनी चाहिए।
सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देश भी अब ईरान के खिलाफ हो गए हैं। वे चाहते हैं कि युद्ध तब तक चले जब तक ईरान की सरकार कमजोर न हो जाए। बहरीन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है। गुरुवार को इसपर वोट हो सकता है।
पहले UAE ईरान को पैसे से मदद करता था और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध थे। युद्ध शुरू होने से पहले UAE शांति बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब UAE ईरान को खतरनाक पड़ोसी मान रहा है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर भी रोक लगा दी है। साथ ही कुछ ईरानी संस्थाओं को भी बंद कर दिया है।
ईरान ने अमेरिका का साथ देने पर हमले की चेतावनी दी
ईरान जंग शुरू होने के बाद कई बार खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी दे चुका है कि अगर कोई भी देश अमेरिका की जंग में मदद करेगा या हार्मुज को फिर से खोलने के प्रयासों में शामिल होगा, तो वह उस देश के अहम बुनियादी ढांचों को हमला कर नष्ट कर देगा।
ईरान ने विशेष रूप से UAE को निशाना बनाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने अमेरिका की मदद की तो उनके बंदरगाहों, एल्यूमिनियम प्लांट्स, गैस फील्ड्स, और बिजली सुविधाओं पर हमले किए जाएंगे।
होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए अहम क्यों
ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह हार्मुज की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है।
ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है।
इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं।

(Bureau Chief, Korba)




