Monday, February 23, 2026

              BREAKING: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी को मिली राहत वापस ली, अब अनिल को फ्रॉड घोषित कर सकेंगे बैंक, ₹40 हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

              मुंबई: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को बैंक अब फ्रॉड घोषित कर सकेंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को उन्हें मिली राहत का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दिसंबर 2025 में 40 हजार करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में बैंकों को फ्रॉड घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।

              दिसंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट की एक सिंगल बेंच ने अनिल अंबानी के खातों को फ्रॉड घोषित करने पर रोक लगा दी थी।

              दिसंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट की एक सिंगल बेंच ने अनिल अंबानी के खातों को फ्रॉड घोषित करने पर रोक लगा दी थी।

              बैंकों ने नियमों का पालन नहीं किया

              • SBI ने एक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अंबानी के खातों को फ्रॉड की श्रेणी में डाल दिया गया था।
              • अंबानी ने इस कार्रवाई को चुनौती दी। कहा कि बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का पालन नहीं किया।
              • दिसंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी के खातों को फ्रॉड घोषित करने पर रोक लगा दी।

              जनवरी में बैंकों ने दी थी चुनौती

              बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और IDBI बैंक ने जनवरी 2026 में सिंगल बेंच के स्टे ऑर्डर को चुनौती दी थी। बैंकों का तर्क था कि वे फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर कार्रवाई करना चाहते हैं। अब बैंक कानून के मुताबिक आगे की कार्यवाही कर सकेंगे।

              अंबानी बोले- बिना अनुमति देश नहीं छोडूंगा

              पिछले हफ्ते अनिल अंबानी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि वे देश छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और बिना अनुमति के विदेश यात्रा नहीं करेंगे।

              अनिल अंबानी ने ये भी कहा था कि रिलायंस ग्रुप (ADAG) की कंपनियों के खिलाफ चल रही ED और CBI की जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

              सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए हैं।

              सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए हैं।

              सुप्रीम कोर्ट ने SIT बनाने के दिए थे निर्देश

              इसी महीने की शुरुआत में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने मामले की जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों (ED और CBI) से पूछा था कि जांच में इतना वक्त क्यों लग रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने ED को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया था ताकि 40,000 करोड़ के इस कथित घोटाले की जांच में तेजी लाई जा सके।


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