वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से 30 जनवरी को जारी एपस्टीन फाइल्स में पूर्व राष्ट्रपति ‘जॉर्ज बुश 1’ पर एक पुरुष के साथ रेप का आरोप लगा है।
जॉर्ज बुश का नाम एपस्टीन की निजी डायरी या रिकॉर्ड में नहीं है। बल्कि उनका जिक्र न्यूयॉर्क पुलिस की चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन यूनिट को दी गई एक शिकायत में है। यह शिकायत उस इंसान ने दी थी, जो खुद को एपस्टीन का पीड़ित बताता है।
दस्तावेजों में शामिल एक ईमेल में पीड़ित के बयान का जिक्र है। इसमें लिखा है कि ‘बुश ने भी उसके साथ बलात्कार किया।’ दस्तावेज में पीड़ित से जुड़ी कुछ और बातें भी लिखी गई हैं, जिनमें उसने एक नाव पर हुई डरावनी घटनाओं का दावा किया।
जॉर्ज डब्ल्यू. बुश 2001 से 2009 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे थे और उनके पिता जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश 1989 से 1993 तक राष्ट्रपति रहे थे। इन दस्तावेजों ये कहीं नहीं बताया गया है कि ‘जॉर्ज बुश 1’ कौन हैं।
वहीं, नई रिलीज फाइल्स में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का 100 से ज्यादा बार जिक्र है। हालांकि ट्रम्प का ज्यादातर जिक्र FBI की लिस्ट में है। FBI ने इसे पिछले साल तैयार किया था।
इसमें वे बातें दर्ज हैं, जो कुछ लोगों ने FBI को फोन करके ट्रम्प के खिलाफ कही थीं। ये आरोप ज्यादातर बिना किसी ठोस सबूत के हैं और सिर्फ फोन पर मिली जानकारियों पर आधारित हैं, जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (बाएं) और उनके बेटे जॉर्ज डब्ल्यू. बुश (दाएं) की तस्वीर। दोनों अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके हैं।
एपस्टीन और बिल क्लिंटन के खिलाफ भी आरोपों का जिक्र
दस्तावेज में आगे बताया गया है कि पीड़ित को माइकल मूर नाम का एक इंसान FBI की इमारत तक ले गया था। माइकल मूर को ‘ट्रू पंडित’ नाम की एक वेबसाइट से जुड़ा हुआ बताया गया है। इस वेबसाइट को फेक न्यूज फैलाने वाला माना जाता है।
इसी दस्तावेज में जेफ्री एपस्टीन और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ भी आरोपों का जिक्र है। इसमें यह भी कहा गया है कि साल 2000 की एक नाव यात्रा में डोनाल्ड ट्रम्प और मेलानिया भी मौजूद थे, जब वे उस समय शादीशुदा नहीं थे।
हालांकि, दस्तावेज में यह भी साफ लिखा गया है कि पीड़ित ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत या गवाह नहीं दिए, जिनकी पुष्टि की जा सके।
ट्रम्प प्रशासन पिछले कुछ समय से कोर्ट के आदेश के बाद यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दशकों पुराने सरकारी रिकॉर्ड पब्लिक कर रहा है। अब जारी हुई नई फाइलों में 30 लाख पेज, 1 लाख 80 हजार तस्वीरें और 2 हजार से ज्यादा वीडियो शामिल हैं।
कौन था जेफ्री एपस्टीन?
जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी।
उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली।
उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है।
एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है
एपस्टीन केस की शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया।
जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है।
धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई।
मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं।
एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी।
हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था।
मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन
साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं।
इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए।
इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर ‘#MeToo’ लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं।
इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की।

जेफ्री एपस्टीन और उसकी प्रेमिका गिस्लेन मैक्सवेल। एपस्टीन की 2019 में जेल में मौत हो गई थी। (फाइल फोटो)
एपस्टीन की गिरफ्तारी, जेल में ही मौत
एपस्टीन के खिलाफ दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में 6 जुलाई 2019 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन को फिर से सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया। 23 जुलाई को उसे सेल में बेहोश पाया गया। उसके गले पर निशान थे। माना गया कि किसी ने उसकी जान लेने की कोशिश की थी।
इसके बाद उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई, लेकिन जल्द ही हटा दी गई। 10 अगस्त 2019 को उसी हाई-सिक्योरिटी जेल में एपस्टीन मरा हुआ मिला। आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या की, लेकिन कई मेडिकल और कानूनी एक्सपर्ट्स ने इस पर सवाल उठाए।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि एपस्टीन की गर्दन की कुछ हड्डियां टूटी हुई थीं। ये चोटें आमतौर पर गला घोंटने से जुड़ी होती हैं, आत्महत्या से नहीं। जिस दिन एपस्टीन की मौत हुई, उस दिन उसकी सेल के बाहर लगे सुरक्षा कैमरे काम नहीं कर रहे थे और फुटेज गायब हो गए थे।
चूंकि एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट में बड़े-बड़े नाम शामिल थे। ऐसे में माना गया कि राज खुलने के डर से उसकी हत्या कराई गई है। एपस्टीन की मौत के बाद FBI और जस्टिस डिपार्टमेंट ने इसकी जांच शुरू की।

(Bureau Chief, Korba)





