Friday, February 27, 2026

              CG: तहसील ऑफिस के क्लर्क की वसूली का VIDEO वायरल… जमीन की परची बनाने किसान से लिए पैसे, बिलासपुर में नायब तहसीलदार का स्टेनो सस्पेंड

              BILASPUR: बिलासपुर में नायब तहसीलदार के कोर्ट के क्लर्क एक किसान से ऋण पुस्तिका बनाने के नाम पर पैसे की वसूली कर रहा था। जिस पर एडिशनल कलेक्टर ने क्लर्क को सस्पेंड कर दिया है। किसान से पैसे वसूली का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें स्टेनो टाइपिस्ट रिश्वत लेते नजर आ रहा है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। पूरा मामला बिल्हा तहसील का है।

              बिल्हा एसडीएम कार्यालय में नायब तहसीलदार विनीता शर्मा के स्टेनो टायपिस्ट जगन्नाथ धुरी के पास गांव का एक किसान ऋण पुस्तिका बनवाने गया था। इस दौरान उसने किसान से पैसों की मांग की, जिसके बाद किसान ने उसे पैसे दिया, तब वह परची बनवा कर नायब तहसीलदार से हस्ताक्षर कराने की बात कही। इस दौरान किसान के साथ गए युवक ने पैसे देने का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद एडिशनल कलेक्टर ने स्टेनो टायपिस्ट जगन्नाथ धुरी को सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि में उसका मुख्यालय तखतपुर रहेगा और उसे जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

              किसान से अवैध वसूली का मामला बिल्हा तहसील का है।

              किसान से अवैध वसूली का मामला बिल्हा तहसील का है।

              सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई
              दरअसल, यह मामला करीब 15 दिन पहले का है। इसका वीडियो अब सामने आया है, जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो में पीड़ित किसान से क्लर्क पैसे लेते हुए दिख रहा है। वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कलेक्टर सौरभ कुमार के निर्देश पर एडिशनल कलेक्टर ने यह कार्रवाई की है।

              वीडियो वायरल होने के बाद एडिशनल कलेक्टर ने क्लर्क को सस्पेंड कर दिया है।

              वीडियो वायरल होने के बाद एडिशनल कलेक्टर ने क्लर्क को सस्पेंड कर दिया है।

              नायब तहसीलदार की मिलीभगत फिर भी नोटिस तक नहीं
              इस अवैध वसूली के खेल में नायब तहसीलदार के मिलीभगत होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार बिना पैसे के किसी भी फाइल में हस्ताक्षर नहीं करती। पीड़ित किसान को क्लर्क ने बताया कि साइन कराने के लिए उन्हें पैसा देना पड़ता है। बाकी उनके खुद के लिए भी चाहिए रहता है। आरोप है कि इस तरह से अवैध वसूली का काम लंबे समय से चल रहा था। इसके बावजूद उन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया है।


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