Chhattisgarh : करंट लगने से मजदूर की मौत, पूर्व पार्षद के घर चल रहा था काम, मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों ने किया हंगामा

                दुर्ग: जिले के भिलाई में बुधवार सुबह एक मजदूर की करंट लगने से मौत हो गई। पूर्व पार्षद जोहन सिन्हा के घर में मजदूर सेप्टिक टैंक निर्माण में काम कर रहा था। हादसे के बाद मजदूर को बीएम शाह हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। मामला छावनी थाना क्षेत्र का है।

                जानकारी के मुताबिक, शास्त्री नगर में वार्ड क्रमांक 28 के पूर्व पार्षद जोहन सिन्हा के घर में सेप्टिक टैंक के गड्ढे का निर्माण चल रहा था। टैंक में पानी भरा हुआ था। वहां चंद्रमणि (35) पानी निकालने के लिए गड्ढे में उतरा। उसे यह पता नहीं था कि पानी में करंट दौड़ रही है। अचानक वो करंट की चपेट में आकर तड़पने लगा।

                मौत के बाद रोता बिलखता परिवार।

                मौत के बाद रोता बिलखता परिवार।

                अस्पताल में डॉक्टर ने मृत घोषित किया

                आनन-फानन में बिजली सप्लाई को रोका गया। इसके बाद चंद्रमणि को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया। उसे तुरंत पास के निजी अस्पताल बीएम शाह ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनते ही पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया।

                कई घंटे तक चला परिजनों का हंगामा

                इधर, मृतक के परिजन और पहचान वाले अस्पताल में सुबह से शाम तक हंगामा किया। परिजन मुआवजे की मांग पर डटे रहे। परिजनों का कहना है कि दो छोटे-छोटे बच्चे और पत्नी हैं। ऐसे में उनका भरण पोषण कैसे होगा। इसलिए जब तक उचित मुआवजा नहीं मिल जाता वे शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराएंगे और न ही अंतिम संस्कार करेंगे।

                पुलिस अधिकारियों और अतिरिक्त तहसीलदार ने समझाया तब जाकर वो लोग माने। हालांकि क्या मसझौता हुआ है यह पता नहीं चला है।

                परिजनों ने मुआवजे की मांग की।

                परिजनों ने मुआवजे की मांग की।

                पूर्व पार्षद ने बताई ठेकेदार की गलती

                पूर्व पार्षद जोहन सिन्हा ने पुलिस को बताया कि, चंद्रमणि निजी ठेकेदार राम अवतार के अधीन काम करता था। बुधवार सुबह वह काम करने के लिए आया था। सेप्टिक टैंक से पानी भरे होने के चलते पहले पानी को निकालने का काम किया जा रहा था। इसके लिए ठेकेदार ने स्वयं की मोटर लगाई थी।

                मोटर खराब हो जाने से उसने चंद्रमण को पानी में उतरने के लिए कहा, लेकिन करंट सप्लाई को बंद नहीं किया। इससे बिजली का करेंट पानी में फैल गया और चंद्रमणि उसकी चपेट में आ गया।


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