Chhattisgarh : प्राचीन भंवर गणेश मंदिर में पांचवीं बार चोरी, गर्भ गृह से बेशकीमती मूर्ति को चोरों ने किया पार; सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान…

              BILASPUR: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले भंवर गणेश मंदिर में स्थापित गरुड़ भगवान की काले ग्रेनाइट की मूर्ति को एक बार फिर से चोरों ने पार कर दिया है। सोमवार की सुबह जब लोग मंदिर पहुंचे, तब दरवाजे का ताला टूटा हुआ मिला और गर्भ गृह से प्राचीन मूर्ति गायब मिली।

              घटना मस्तूरी थाना क्षेत्र की है। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। लोगों का कहना है कि पुरातात्विक महत्व की इस मूर्ति की सुरक्षा पर जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि बेशकीमती मूर्ति पांचवीं बार चोरी हुई है। पिछले साल भी चोरों ने मंदिर में धावा बोलकर सेवादार को बंधक बनाकर मूर्ति लूट ली थी।

              10वीं शताब्दी की है मूर्ति

              पुरातात्विक महत्व की नगरी मल्हार के पास इटवा पाली गांव है। यहां भंवर गणेश के मंदिर में 10वीं सदी की प्राचीन गरुड़ भगवान की ग्रेनाइट की मूर्ति है। मंदिर की देखरेख करने वाला सेवक महेश केंवट सोमवार की सुबह करीब 5.30 बजे मंदिर पहुंचा, तब दरवाजे का ताला टूटा मिला।

              वहीं, गर्भ गृह में स्थापित प्रतिमा भी गायब मिली, जिसके बाद सेवादार ने सरपंच सहित गांव के लोगों को चोरी की सूचना दी। इसके बाद उन्होंने पुलिस को मूर्ति चोरी होने की जानकारी दी। प्राचीन और बेशकीमती मूर्ति चोरी होने की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। घटनास्थल की जांच की गई है।

              बेशकीमती मूर्ति चोरी होने की जानकारी मिलते ही पहुंची पुलिस।

              बेशकीमती मूर्ति चोरी होने की जानकारी मिलते ही पहुंची पुलिस।

              प्राचीन और पुरातात्विक महत्व की मूर्ति की नहीं है सुरक्षा

              मल्हार और आसपास कई प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिले हैं, जिनमें यह प्राचीन भंवर गणेश मंदिर और यहां स्थापित ग्रेनाइट से बनी गरुड़ भगवान की मूर्ति भी है। लेकिन, जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने अब तक इस मूर्ति की सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए हैं, जिसके कारण लगातार मूर्ति चोरी हो रही है।

              इससे पहले भी 4 बार चोरों ने मंदिर को निशाना बनाया और बेशकीमती मूर्ति को चोरी कर ले गए। हालांकि, हर बार मूर्ति बरामद कर ली गई।

              इससे पहले भी सेवादार को बंधक बनाकर मूर्ति लूटकर ले गए थे बदमाश।

              इससे पहले भी सेवादार को बंधक बनाकर मूर्ति लूटकर ले गए थे बदमाश।

              पांचवीं बार चोरी हुई मूर्ति

              ग्रेनाइट से बनी इस मूर्ति की कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। यही वजह है कि मूर्ति बार-बार चोरी हो रही है। पहली बार 2004 में ग्रेनाइट से बनी प्रतिमा को चोरी किया गया था। हालांकि, तब चोर इसे जिले से बाहर नहीं ले जा सके थे। मूर्ति को पुलिस ने बरामद कर लिया था।

              इसके बाद अप्रैल 2006 में भी मूर्ति की चोरी हो गई। हालांकि, मूर्ति को बाहर ले जाने में नाकामयाब चोरों ने उसे गांव के पास ही छोड़ दिया था। फिर 2007 में भी मंदिर से मूर्ति चोरी की कोशिश की गई थी। इसके बाद 26 अगस्त 2022 को चोरों ने सेवादार की कनपटी पर कट्‌टा अड़ाकर उसे बंधक बना लिया और मूर्ति लूट कर ले गए थे। हालांकि, पुलिस ने चोरों को पकड़ लिया और मूर्ति को बरामद भी कर लिया।

              गांव के लोगों से पूछताछ कर जानकारी जुटा रही है पुलिस।

              गांव के लोगों से पूछताछ कर जानकारी जुटा रही है पुलिस।

              चोरों ने मूर्ति को कर दिया था खंडित

              सालों पुरानी ऐतिहासिक मूर्ति करीब 3 फीट ऊंची और 65 किलो वजनी है। पिछली बार मूर्ति को चोरों ने पहले उखाड़ने की कोशिश की थी। इसके लिए वे औजार लेकर भी पहुंचे थे, लेकिन मूर्ति को उखाड़ नहीं पाए। इसलिए उसे औजार से तोड़कर ले गए थे। पुलिस ने मूर्ति को चार टुकड़ों में बरामद किया था।

              ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की है ग्रेनाइट से बनी मूर्ति।

              ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की है ग्रेनाइट से बनी मूर्ति।

              ऐतिहासिक डिड़िनेश्वरी देवी का समकालीन है भंवर गणेश मंदिर

              इटवा पाली स्थित भंवर गणेश मंदिर और ग्रेनाइट की दुर्लभ मूर्ति मल्हार स्थित डिड़िनेश्वरी देवी की समकालीन है। सातवीं से दसवीं सदी के बीच विकसित मल्हार की मूर्तिकलाओं में भंवर गणेश को भी प्रमुख माना जाता है। मल्हार में बौद्ध स्मारकों और प्रतिमाओं का निर्माण इस काल की विशेषता मानी जाती है। मल्हार और आसपास कई प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिलते हैं। यह एक महत्वपूर्ण पुरातत्व स्थल है।


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