Sunday, February 15, 2026

              तलाक के बाद भी पैतृक संपत्ति पर बेटी का अधिकार… आयोग ने कहा- कोई नहीं छीन सकता हक, पिता ने किया था बेदखल

              BILASPUR: बिलासपुर में महिला आयोग की सुनवाई के दौरान माता-पिता के तलाक के बाद 20 साल की बेटी ने अपना हक दिलाने की मांग की। इस केस की सुनवाई के दौरान आयोग ने गुरुवार को पिता और परिजन को तलब कर जवाब मांगा। सुनवाई के बाद आयोग ने कहा है कि पति-पत्नी के तलाक के बाद भी पिता अपनी बेटी को पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं कर सकता। आयोग ने केस की सुनवाई 12 जून को रायपुर में करने का फैसला लिया है।

              राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्य अर्चना उपाध्याय एवं डॉ. अनिता रावटे ने गुरुवार को जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभा कक्ष में महिला उत्पीड़न से संबंधित 35 मामलों की सुनवाई हुई। इस दौरान मुंगेली जिले के पथरिया क्षेत्र के बिरकोनी हाई स्कूल पदस्थ व्याख्याता ने 2006 को अपनी पत्नी को घर से निकाल दिया, जिसके बाद से महिला अपनी दो साल की सिंकलिन पीड़ित अपनी बेटी की भरण-पोषण करती रही।

              अब उनकी बेटी 20 साल की हो गई है और बीबीए सेकेण्ड ईयर की स्टूडेन्ट है। उसे पढ़ाई लिखाई और इलाज के लिये आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए वह अपने पिता से सम्पति में अपना हक मांगने के लिए आवेदन लगाई है।

              बेटे की चाहत में पत्नी को निकाला
              दरअसल, टीचर की पहली पत्नी से एक बेटी हुई, जिसके बाद उसका बेटा नहीं हो रहा था। इसी के चलते उसने अपनी पत्नी को घर से निकाल दिया था। बाद में वंश चलाने के नाम पर उसने दूसरी शादी रचा ली।

              महिला आयोग की जनसुनवाई में रखे गए 35 प्रकरण।

              महिला आयोग की जनसुनवाई में रखे गए 35 प्रकरण।

              पिता बोला- 2012 में हो गया है तलाक, दूसरी पत्नी से है दो बेटी
              सुनवाई के दौरान टीचर पिता ने आयोग को बताया कि परिवार न्यायालय से साल 2012 में उसने अपनी पहली पत्नी से विधिवत तलाक लिया है। अब उसने दूसरी शादी कर ली है और उनकी दो बेटियां हैं। इस पर आयोग ने पूछा की अपनी बेटी का नाम शासकीय अभिलेखों में क्यों दर्ज नहीं कराया है, तब वह गोलमोल जवाब देने लगा। इस दौरान टीचर के पिता ने कहा कि सभी कृषि भूमि की पर्ची में अपनी पोती का नाम दर्ज कराएंगे और अपने शासकीय अभिलेख में भी अपनी पोती का नाम एक माह के भीतर दर्ज कराएंगे।

              आयोग ने कहा कि कहा कि तलाक पत्नी से होता है, बेटी से नहीं होता है। बेटी का पिता के जायजाद में बराबर का हक होता है। वर्तमान में टीचर अपनी बेटी की पढ़ाई लिखाई का पूरा खर्च वहन नहीं कर रहा है। इसलिए इस केस की अगली सुनवाई में 12 जून को रायपुर में होगी, जिसमें उन्हें उपस्थित होने के लिए कहा गया है।


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