छत्तीसगढ़ के किसानों को इस साल धान विक्रय पर प्रति एकड़ साढ़े 25 हजार का अतिरिक्त लाभ…

          • प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का आदेश लागू
          • धान बेच चुके किसानों को भी मिलेगा इसका लाभ

          रायपुर: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की गारंटी को राज्य में लागू किए जाने के लिए राज्य शासन द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का आदेश लागू हो गया है। किसानों को इसके मान से टोकन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सोमवार तक सौ फीसद सोसायटियों में इसका क्रियान्वयन होने लगेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान विक्रय लाभ पूर्व में धान बेच चुके किसानों को भी मिलेगा। इसका आशय यह है कि एक नवम्बर से अब तक पूर्व निर्धारित मात्रा के अनुरूप धान बेच चुके किसान शेष मात्रा का धान उपार्जन केन्द्र में 31 जनवरी तक बेच सकेंगे।

          उल्लेखनीय है कि 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से होने पर राज्य के किसानों को बीते खरीफ विपणन वर्ष की तुलना में इस साल प्रति एकड़ धान विक्रय पर लगभग 25,500 रूपए का अतिरिक्त लाभ होगा। खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 15 क्विंटल कॉमन धान की 2040 रूपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की दर से किए जाने के साथ ही उन्हें प्रति एकड़ 9000 रूपए की इनपुट सब्सिडी दी गई, जिसे मिलाकर अधिकतम 39,600 रूपए का भुगतान होता था। इस साल 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से होने से किसानों को प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान बेचने पर 65,100 रूपए मिलेगा। इस प्रकार देखा जाए तो इस साल धान विक्रय पर किसानों को गत वर्ष की तुलना में 25,500 रूपए का अतिरिक्त लाभ होगा।

          राज्य में समर्थन मूल्य पर अब तक 10 लाख 61 हजार से अधिक किसानों से धान 48 लाख 95 हजार टन धान की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों को 12 हजार 81 करोड़ रूपए का भुगतान बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत किया गया है। धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए निरंतर धान का उठाव जारी है। अब तक 37 लाख 55 हजार 346 टन धान के उठाव के लिए डीओ जारी किया गया है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 27 लाख 31 हजार 643 टन धान का उठाव किया जा चुका है। इस साल राज्य में 130 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी अनुमानित है। समर्थन मूल्य पर धान उर्पाजन के एवज में किसानों को लगभग 40 हजार करोड़ का भुगतान होगा।



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