KORBA: स्टेज-3 लिम्फोमा कैंसर का सफल इलाज कर डॉ. रवि जायसवाल ने 07 वर्षीय बच्चे को दिया नया जीवन

              • मुंगेली का रहने वाला बच्चा कैंसर को मात देकर अब जी रहा सामान्य जीवन

              कोरबा (BCC NEWS 24): जाने माने कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.रवि जायसवाल ने कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में अपने अविराम सफर के दौरान लगातार अर्जित की जा रही उपलब्धियों की कड़ी में एक और कड़ी जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के मुंगेली निवासी 07 वर्षीय बच्चे के तीसरे स्टेज के लिम्फोमा कैंसर का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया है, बच्चा अब पूर्णरूप से स्वस्थ हो चुका है तथा सामान्य जीवन जी रहा है। कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की रूह कांप उठती है, जिस व्यक्ति को कैंसर डायग्नोस होता है उस व्यक्ति का परिवार सदमे में आ जाता है, परिवार बिखराव की कगार में पहुंच जाता है, ऐसे ही मुंगेली निवासी एक परिवार के 07 वर्षीय लाडले को तीसरे स्टेज का लिम्फोमा कैंसर डायग्नोस हुआ, वर्ष 2021 में उसका ईलाज डॉ.रवि जायसवाल के द्वारा प्रारंभ किया गया, 12 कीमोथेरेपी हुई, लगभग एक वर्ष तक ईलाज चला, अब वह 07 वर्षीय बालक पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहा है, बच्चे के अभिभावक व परिवार के सदस्य डॉ.रवि जायसवाल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि डॉ.रवि उनके लिए देवदूत के समान है, जिन्होने के परिवार के लाडले बेटे को नया जीवन दिया है।

              लसिका तंत्र को प्रभावित करता है लिम्फोमा

              डॉ.रवि जायसवाल ने बताया कि लिम्फोमा एक प्रकार का कैंसर है, जो मरीज के लसिका तंत्र को प्रभावित करता है, लिम्फोमा तब होता है लसिका तंत्र में लिम्फो साईटस असामान्य रूप से बढ़ते हैं तथा आपस गुणा करते हैं। उन्होने बताया कि लसिका तंत्र प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है, यह प्रणाली पतली नलिकाओं, ऊतको और अंगों के माध्यम से पूरे शरीर में तरल प्रदार्थ एवं रक्त कोशिकाओं को पहुंचाती है, इसमें अस्थिमज्जा, लिम्फनोड्स, प्लीहा, टांसिल और अपेडिक्स शामिल है, इसी महत्वपूर्ण प्रणाली को लिम्फोमा प्रभावित करता है।

              चौथे स्टेज के लग्स कैंसर का केवल टेबलेट से ईलाज

              कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ.रवि जायसवाल ने अनेक बड़ी उपलब्धियांॅ अर्जित की हैं, हजारों मरीजों को नया जीवन दिया है व कैंसर के भयानक चंगुल से मरीजों को छुटकारा दिलाया है। एक ओर जहॉं उन्होने बिना कीमो, बिना सर्जरी, केवल टेबलेट के माध्यम से चौथे स्टेज के लग्स कैंसर के मरीज को स्वस्थ किया, वहीं दूसरी ओर मध्य भारत का पहला उदाहरण बनाते हुए 60 वर्षीय महिला का बौनमैरो ट्रांसप्लांट कर इतिहास रचा है। इतनी अधिक उम्र के मरीज का सफल बौनमैरा ट्रांसप्लांट करना कैंसर चिकित्सा क्षेत्र में मध्य भारत की पहली घटना है।

              इम्यूनोथेरेपी से चौथे स्टेज के कैंसर का ईलाज

              डॉ.रवि जायसवाल का कहना है कि कुछ प्रकार के कैंसर के ईलाज में इम्यूनोथेरेपी अत्यंत कारगर है तथा मरीज के चौथे स्टेज के कैंसर को भी ठीक किया जाना अब पूर्ण रूप से संभव हो चुका है। इम्यूनोथेरेपी के साईड इफेक्ट कीमोथेरेपी की अपेक्षा बहुत ही कम या नाम मात्र के होते हैं। इस थेरेपी में मरीज को केवल इंजेक्शन लगाया जाता है, जिससे मरीज के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी अधिक बढ़ जाती है कि मरीज का शरीर ही कैंसर के सेल्स को मारकर कैंसर को समाप्त कर देता है। डॉ.रवि ने बताया कि फेफडे़ के कैंसर, रेक्टल कैंसर, मुंख कैंसर, बड़ी आंत, किडनी ब्लेडर आदि के कैंसर में इम्यूनोथेरेपी बहुत ही ज्यादा सक्सेजफुल है। 


                              Hot this week

                              Related Articles

                              Popular Categories