Monday, April 15, 2024
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KORBA : NTPC के खिलाफ आमरण अनशन जारी, भू-विस्थापितों ने खोला मोर्चा, बुजुर्ग की बिगड़ी तबीयत; बोली- जब तक मांग पूरी नहीं होती जारी रखेंगे आंदोलन

KORBA: कोरबा के एनटीपीसी के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे भू-विस्थापितों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। आंदोलन में शामिल पांच भू-विस्थापितों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि अन्य सदस्यों ने साफ तौर पर अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन जमनीपाली दर्री के लिए वर्षों पहले चारपारा कोहड़िया सहित कुछ अन्य गांव की जमीन अधिग्रहित की गई थी। जमीन अधिग्रहण के दौरान भू-विस्थापितों को मुआवजा के अलावा नौकरी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कई ऐसे परिवार हैं, जिन्हें सालों बाद भी नौकरी और अन्य सुविधाएं नहीं मिल सकी।

बीमार भू-विस्थापितों को भेजा गया अस्पताल।

बीमार भू-विस्थापितों को भेजा गया अस्पताल।

भू-विस्थापितों की समस्या का निराकरण नहीं

इस दौरान कई मर्तबे भू-विस्थापितों और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच प्रशासनिक अफसर की मौजूदगी में बैठक की गई। इसके बावजूद भू-विस्थापितों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ। कुछ माह पूर्व तत्कालीन कलेक्टर ने नौकरी के आश्वासन तो दिए, लेकिन उनके आश्वासन के बाद भी किसी तरह की पहल नहीं हुई।

प्रशासन के खिलाफ आमरण अनशन

आक्रोशित भू-विस्थापितों ने परिवार सहित तानसेन चौक में एनटीपीसी प्रबंधन और जिला प्रशासन के खिलाफ आमरण अनशन शुरू कर दिया है। 30 जनवरी से चलने वाले इस आमरण अनशन के छठवें दिन अचानक एक भू विस्थापित की तबीयत बिगड़ गई।

NTPC के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा।

NTPC के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा।

प्रशासनिक अफसरों के हाथ पांव फूल गए

यह खबर मिलते ही प्रशासनिक अफसरों के हाथ पांव फूल गए। वे तत्काल हरकत में आ गए। प्रशासन की ओर से तहसीलदार व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने राजन पटेल, घसिया राम, रामायण, शुभम केंवट और एक अन्य को संजीवनी एक्सप्रेस के माध्यम से मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवाया।

आमरण अनशन पर बैठी बुजुर्ग महिला।

आमरण अनशन पर बैठी बुजुर्ग महिला।

आमरण अनशन में बैठी बुजुर्ग महिला

खास बात तो यह है कि आमरण अनशन में बैठी बुजुर्ग महिला सहित अन्य सदस्यों ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि जब तक प्रशासन की ओर से नौकरी संबंधी लिखित पत्र जारी नहीं किया जाता है, वे आमरण अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

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