KORBA : अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना से बदली कुमार गौरव ताड़िया की जिंदगी

            मल्टी स्टोर के लिए मिला ऋण और अनुदान, अब हर माह हो रही 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी

            कोरबा (BCC NEWS 24): जिले के अनुसूचित जाति वर्ग के हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) प्रभावी साबित हो रही है। इसी योजना से लाभान्वित होकर ग्राम सेमीपाली, पोस्ट कुदुरमाल, तहसील भैंसमा, जिला कोरबा निवासी कुमार गौरव ताड़िया ने अपने जीवन में आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। कुमार गौरव ताड़िया, पिता देव लाल, ने बताया कि उन्हें स्थानीय समाचार पत्र के माध्यम से जानकारी मिली कि अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति, कोरबा द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के हितग्राहियों को विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के तहत ऋण उपलब्ध कराया जाता है। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जिला कार्यालय, अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति, कोरबा में आवेदन प्रस्तुत किया।

            आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनका प्रकरण बैंक ऑफ बड़ौदा, कोरबा को प्रेषित किया गया। बैंक के माध्यम से उन्हें अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के अंतर्गत मल्टी स्टोर संचालन हेतु 01 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। साथ ही जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति द्वारा 50 हजार रुपये की अनुदान राशि भी प्रदान की गई। इस आर्थिक सहयोग से कुमार गौरव ने अपना मल्टी स्टोर व्यवसाय प्रारंभ किया। कुमार गौरव बताते हैं कि दुकान शुरू होने के बाद अब उन्हें प्रतिमाह लगभग 20 हजार से 25 हजार रुपये तक की आय होने लगी है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उन्हें आजीविका का स्थायी साधन भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि वे बैंक से प्राप्त ऋण की नियमित किस्त जमा कर रहे हैं।

            उन्होंने शासन की इस योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। पहले जहां रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था, वहीं अब वे स्वयं का व्यवसाय संचालित कर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं। जिले में संचालित ऐसी योजनाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। शासन की मंशा है कि अधिक से अधिक पात्र हितग्राही इन योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार स्थापित करें और आत्मनिर्भर बनें।


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