Wednesday, February 11, 2026

            नई दिल्ली: 1 जनवरी को लॉन्च हो रहा भारत टैक्सी एप, ओला-उबर को मिलेगी टक्कर; पीक आवर्स में किराया नहीं बढ़ेगा, ड्राइवर्स को ज्यादा कमाई

            नई दिल्ली: नए साल यानी 1 जनवरी 2026 से भारत टैक्सी एप लॉन्च हो रहा है। ये सरकारी सपोर्ट वाला एप है, जो पैसेंजर्स और ड्राइवर्स दोनों के लिए फायदेमंद होगा। एप में ऑटो-रिक्शा, कार और बाइक की सर्विस उपलब्ध होगी। यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से ऑप्शन चुन सकेंगे।

            ओला और उबर जैसे ऐप्स में पीक ऑवर्स में किराया अचानक बढ़ जाता है, जिससे पैसेंजर्स परेशान होते हैं। भारत टैक्सी ऐप में ऐसा नहीं होगा। किराया स्थिर रखने की कोशिश की जाएगी। ये एप सरकारी पहल का हिस्सा है, इसलिए पैसेंजर्स को सस्ती और भरोसेमंद सर्विस मिलेगी।

            ड्राइवर्स को किराए का 80% से ज्यादा हिस्सा

            ड्राइवर्स को कुल किराए का 80% से ज्यादा हिस्सा मिलेगा। यानी, ड्राइवर्स की कमाई बढ़ेगी। अभी ज्यादातर प्राइवेट एप्स में कमीशन ज्यादा कटता है, जिससे ड्राइवर्स की कमाई कम हो जाती है। लॉन्च से पहले ही दिल्ली में करीब 56,000 ड्राइवर्स रजिस्टर कर चुके हैं।

            टैक्सी में रियल-टाइम व्हीकल ट्रैकिंग मिलेगी

            दूसरे एप्स की तरह भारत टैक्सी एप में भी रियल-टाइम व्हीकल ट्रैकिंग मिलेगी। सेफ्टी और रिलायबिलिटी के लिए प्लेटफॉर्म सिर्फ वेरिफाइड ड्राइवर्स को ही ऑनबोर्ड करेगा और 24 घंटे कस्टमर सपोर्ट देगा। एप कई भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करेगा।

            ओला-उबर से कैसे अलग है भारत टैक्सी?

            सर्ज प्राइसिंग नहीं होगी: ओला-उबर में पीक टाइम या बारिश में किराया अचानक 2-3 गुना बढ़ जाता है। भारत टैक्सी में किराया स्थिर रखने की कोशिश होगी, ताकि पैसेंजर्स को महंगा न पड़े।

            ड्राइवर्स को ज्यादा कमाई: भारत टैक्सी में ड्राइवर्स को कुल किराए का 80% से ज्यादा हिस्सा मिलेगा। ओला-उबर में कमीशन ज्यादा कटता है, जिससे ड्राइवर्स की नेट कमाई कम रहती है।

            सरकारी सपोर्ट और भरोसा: भारत टैक्सी सरकारी पहल का हिस्सा है, इसलिए ट्रांसपेरेंसी और रेगुलेशन ज्यादा होगा। ओला-उबर पूरी तरह प्राइवेट कंपनियां हैं।

            ड्राइवर भी सह-मालिक होंगे

            भारत टैक्सी पहला राष्ट्रीय सहकारी राइड हेलिंग प्लेटफार्म है, जिसे सहकारिता मंत्रालय और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन ने तैयार किया है। इसमें ड्राइवर भी सह-मालिक होंगे। इसके लिए सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के साथ बीते दिनों एमओयू हो चुका है।

            आगे क्या होगा?

            ये एप दिल्ली से शुरू हो रहा है, लेकिन जल्द दूसरे शहरों में भी आ सकता है। सरकारी सपोर्ट से ये कैब मार्केट में नया ऑप्शन बनेगा। पैसेंजर्स को सस्ती यात्रा और ड्राइवर्स को बेहतर कमाई मिलेगी। प्राइवेट प्लेयर्स की मनमानी कम होगी।


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