Sunday, March 1, 2026

              नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 दिन की साउथ अफ्रीका यात्रा पर रवाना, जी-20 समिट में हिस्सा लेंगे, ट्रम्प ने पहले बायकॉट का ऐलान किया था, परंतु अब अपने राजदूत को भेजेंगे

              नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी शुक्रवार सुबह तीन दिन की साउथ अफ्रीका यात्रा पर रवाना हुए हैं। मोदी के आज शाम 6 बजे तक साउथ अफ्रीका पहुंचने की उम्मीद है। वे जोहान्सबर्ग में होने वाले G20 देशों के 20वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

              इस बार की G20 मीटिंग साउथ अफ्रीका की मेजबानी में हो रही है। PM मोदी 21 से 23 नवंबर तक साउथ अफ्रीका में रहेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री तीन मुख्य सेशंस में बोलेंगे।

              समिट के दौरान PM मोदी कई देशों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात भी करेंगे। इसके अलावा वे इंडिया-ब्राजील-साउथ अफ्रीका (IBSA) देशों की बैठक में भी शामिल होंगे।

              यह मोदी की दक्षिण अफ्रीका की चौथी आधिकारिक यात्रा है। इससे पहले 2016 में द्विपक्षीय यात्रा और उसके बाद 2018 और 2023 में दो ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों के लिए मोदी गए थे।

              वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने G20 समिट में भाग नहीं ले रहे हैं। एक दिन पहले ट्रम्प ने अपने रुख में बदलाव करते हुए साउथ अफ्रीका में अपने कार्यवाहक राजदूत मार्क डी. डिलार्ड को भेजने का ऐलान किया है।

              मोदी के साउथ अफ्रीका रवाना होने की तस्वीरें…

              मोदी शुक्रवार सुबह साउथ अफ्रीका की यात्रा पर रवाना हुए हैं।

              मोदी शुक्रवार सुबह साउथ अफ्रीका की यात्रा पर रवाना हुए हैं।

              मोदी तीन दिन साउथ अफ्रीका में रहेंगे।

              मोदी तीन दिन साउथ अफ्रीका में रहेंगे।

              मोदी बोले- अफ्रीका में आयोजित होने वाला यह पहला G20 समिट

              रवाना होने से पहले मोदी ने स्टेटमेंट जारी कर कहा- मैं दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में जोहान्सबर्ग में हो रहे 20वें G20 समिट में भाग लेने के लिए 21-23 नवंबर तक की यात्रा पर जा रहा हूं। यह यात्रा दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के निमंत्रण पर हो रही है।

              मोदी ने आगे बताया कि, यह समिट खास होगा क्योंकि यह अफ्रीका में आयोजित होने वाला पहला G20 शिखर सम्मेलन होगा। 2023 में भारत की G20 की अध्यक्षता के दौरान, अफ्रीकी यूनियन G20 का सदस्य बन चुका था।

              मोदी ने कहा- यह शिखर सम्मेलन प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का एक अवसर होगा। इस वर्ष के जी-20 का विषय ‘एकजुटता, समानता और स्थिरता’ है, जिसके माध्यम से दक्षिण अफ्रीका ने नई दिल्ली, भारत और रियो डी जेनेरियो, ब्राजील में आयोजित पिछले शिखर सम्मेलनों के परिणामों को आगे बढ़ाया है।

              उन्होंने कहा कि वो इस समिट में भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी ‘एक परिवार और एक भविष्य’ के दृष्टिकोण को फिर से सामने रखेंगे। वहीं, मोदी ने IBSA समिट में शामिल होने की बात कही। इस यात्रा के दौरान मोदी दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात करेंगे।

              ट्रम्प G20 समिट में शामिल नहीं होंगे, राजदूत भेजेंगे

              अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे G20 समिट में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया है कि साउथ अफ्रीका में मानवाधिकार उल्लंघन हो रहे हैं। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया था कि साउथ अफ्रीका में श्वेत किसानों पर अत्याचार हो रहा है।

              G20 समिट से एक दिन पहले अमेरिकी प्रतिनिधि भेजने के अपने रुख में बदलाव कर लिया है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा ने गुरुवार को कहा कि उन्हें अमेरिका की ओर से एक नोटिस मिला है, जिसमें कहा गया है कि शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बारे में उनका मन बदल गया है।

              व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि प्रशासन ने साउथ अफ्रीका में अपने कार्यवाहक राजदूत मार्क डी. डिलार्ड को भेजने की योजना बनाई है, लेकिन वो सिर्फ समिट के लास्ट सेशन में भाग लेंगे।

              ट्रम्प ने पहले कहा था कि कोई भी अमेरिकी अधिकारी साउथ अफ्रीका नहीं जाएगा। इसके जवाब में भारत में साउथ अफ्रीका के हाई कमिश्नर अनिल सूकलाल ने कहा कि G20 अब इतना बड़ा मंच बन चुका है कि एक देश के न आने से इसका काम नहीं रुकता।

              अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक साउथ अफ्रीका के अमेरिका विरोधी रुख की वजह से यह फैसला लिया गया है।

              अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक साउथ अफ्रीका के अमेरिका विरोधी रुख की वजह से यह फैसला लिया गया है।

              G20 क्या है?

              G20 (ग्रुप ऑफ ट्वेंटी) दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। यूरोपीय यूनियन, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका, साउथ कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका इसमें शामिल हैं।

              ये देश ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटीज का 85% और ट्रेड का 75% हिस्सा रखते हैं।

              2008 में G20 की पहली समिट हुई

              1997-98 में एशिया के कई देश (थाईलैंड, इंडोनेशिया, कोरिया आदि) आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। उस समय सिर्फ G7 (7 अमीर देश) फैसले लेते थे, लेकिन संकट एशिया में था।

              G7 ने महसूस किया कि अब सिर्फ 7 देश मिलकर दुनिया नहीं चला सकते, बल्कि भारत, चीन, ब्राजील जैसे विकासशील देशों को भी शामिल करना पड़ेगा। इन देशों ने 1999 में G20 बनाया। शुरू में यह सिर्फ वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों का फोरम था। फिर 2008 में फैसला लिया गया कि सिर्फ वित्त मंत्री नहीं, देशों के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री भी इसमें शामिल होंगे। नवंबर 2008 में वाशिंगटन में पहली लीडर्स समिट हुई। इसके बाद हर साल यह समिट की जाती है।


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