Monday, February 16, 2026

              नई दिल्ली: देशभर में एक साथ होगा वोटर्स लिस्ट वेरिफिकेशन, दावा- बिहार में चुनाव हैं, इसलिए SIR पहले हुआ; अन्य राज्यों में तारीख की घोषणा जल्द होगी

              नई दिल्ली: बिहार में वोटर्स लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) यानी वोटर्स लिस्ट वेरिफिकेशन के बाद, अब चुनाव आयोग पूरे देश में एक साथ SIR कराएगा। NDTV ने सूत्रों के हवाले से बताया कि SIR की शुरुआत कब होगी, अभी तक इसकी आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई है।

              सूत्रों ने बताया कि बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए चुनाव आयोग ने सबसे पहले बिहार में SIR किया। देश के बाकी हिस्सों के लिए SIR की तारीख का ऐलान अलग से जारी किया जाएगा। चुनाव आयोग ने इस साल 24 जून को अपने एक आदेश के जरिए पूरे देश में SIR करने की घोषणा की थी।

              चुनाव आयोग ने देशभर में SIR की रूपरेखा पर चर्चा करने के लिए बुधवार को दिल्ली में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEO) ज्ञानेश कुमार भी मौजूद थे।

              मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार के बाद, इस साल के अंत में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले SIR शुरू हो सकती है। इसका मुख्य मकसद जन्म स्थान की जांच करके अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है।

              इससे पहले, चुनाव आयोग ने मंगलवार को बिहार चुनाव आयोग को लेटर भेजकर मतदाताओं की पहचान के लिए आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश के बाद आया है।

              सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार पहचान का प्रमाण, नागरिकता का नहीं

              सुप्रीम कोर्ट में 8 सितंबर को बिहार में SIR (वोटर वेरिफिकेशन) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कहा- आधार पहचान का प्रमाण पत्र है, नागरिकता का नहीं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को वोटर की पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर मानने का भी आदेश दिया।

              जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि आधार को लेकर अगर किसी तरह की शंका हो तो इसकी जांच कराएं। कोई भी नहीं चाहता कि अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जाए।

              SIR का मकसद- वोटर लिस्ट को अपडेट करना

              चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अवैध मतदाताओं जैसे विदेशी नागरिकों, मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित लोगों को हटाना है। इस बीच कई राज्यों में बांग्लादेश और म्यांमार से आए प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है।

              चुनाव आयोग ने SIR के लिए 2 तरीके बताए…

              पहला: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर, एक प्री-फील्ड फॉर्म गणना प्रपत्र (मतदाता की जानकारी और दस्तावेज) लेकर जाएंगे।

              दूसरा: कोई भी व्यक्ति चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर यह फॉर्म डाउनलोड करके उसे भर सकता है।

              स्क्रीनिंग के 4 नियम

              • वोटर का नाम अगर 2003 की लिस्ट में है तो कोई दस्तावेज नहीं देना होगा। सिर्फ फॉर्म भरना होगा।
              • 1 जुलाई 1987 से पहले जन्म हुआ है तो जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाण देना होगा।
              • 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म हुआ तो जन्मतिथि और जन्मस्थान दोनों का प्रमाण देना होगा।
              • 2 दिसंबर, 2004 के बाद जन्मे हैं तो जन्मतिथि, जन्मस्थान का प्रमाण और माता-पिता के दस्तावेज देने होंगे।

              विपक्ष ने पूरे मानसून सत्र SIR का विरोध किया

              संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष ने संसद परिसर और सदन में प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसद बिहार SIR पर चर्चा कराने की मांग करते रहे। उनके विरोध और हंगामे के कारण दोनों सदनों में आखिरी दिन भी सदन की कार्यवाही नहीं हो सकी।


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