रायपुर : दंतेवाड़ा : लाइवलीहुड कॉलेज में आत्मसमर्पित व्यक्तियों को दिया जा रहा ट्रैक्टर प्रशिक्षण

              स्वावलंबन की राह पर बढ़ते कदम: अब मुख्यधारा में लौटे युवा बनेंगे आत्मनिर्भर

              रायपुर (BCC NEWS 24): दंतेवाड़ा जिले में मुख्यधारा में लौटे आत्मसमर्पित व्यक्तियों (पुनर्वासितों) को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष पहल की गई है। इसके अंतर्गत लाइवलीहुड कॉलेज, दंतेवाड़ा में उन्हें ट्रैक्टर चलाने और उसके रखरखाव का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन्हें हुनरमंद बनाकर समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए तैयार करना है।

              स्वावलंबन की राह पर बढ़ते कदम: अब मुख्यधारा में लौटे युवा बनेंगे आत्मनिर्भर

              प्रभारी मंत्री ने की जिला प्रशासन की सराहना

              जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आत्मसमर्पित हितग्राहियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लाइवलीहुड कॉलेज का यह प्रयास अनुकरणीय है। उन्होंने जिला प्रशासन के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कौशल विकास नहीं, बल्कि इन व्यक्तियों के आत्मविश्वास को बढ़ाकर उन्हें समाज में एक नई और मजबूत पहचान दिलाना है।

              व्यावहारिक और तकनीकी कौशल पर जोर

              प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ट्रैक्टर चलाने की सुरक्षित और प्रभावी विधियां बताई जा रही है। इसके अलावा रखरखाव (Maintenance) की तकनीकी बारीकियां और मशीनों की देखभाल, किसानी के कार्यों में ट्रैक्टर का आधुनिक उपयोग, स्वरोजगार और व्यावसायिक संभावनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में हितग्राहियों को व्यावहारिक (Practical) और तकनीकी दोनों प्रकार का प्रशिक्षण मिल रहा है। प्रशिक्षण की समाप्ति के बाद प्रशासन द्वारा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें।

              बदलाव की लहरः हितग्राहियों में जगा नया विश्वास

              प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हितग्राहियों ने उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से उन्हें जीवन की एक नई दिशा मिली है। अब वे भविष्य को लेकर आशान्वित हैं और स्वयं के पैरों पर खड़े होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह पहल न केवल पुनर्वास प्रक्रिया को मजबूती दे रही है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो रही है।


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