रायपुर (BCC NEWS 24): दुर्ग जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने खेतों में फसल अवशेष (पैरा/भूसा) जलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए निर्देशित किया है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियमों का उल्लंघन ना करने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फसल अवशेष जलाने से न केवल वायु प्रदूषण फैलता है, बल्कि मिट्टी की ऊपरी 15 सेमी परत में मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीवी भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार, 1 टन धान के अवशेष जलाने से लगभग 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस और 25 किलो पोटैशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के हित में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें। इसके विकल्प के रूप में ’हैप्पी सीडर’ और ’जीरो सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल जैसे आधुनिक यंत्रों के उपयोग की सलाह दी गई है, जिससे बिना अवशेष जलाए भी अगली फसल की बुवाई संभव है। इसके अतिरिक्त, अवशेषों को गड्ढों में डालकर वर्मी कंपोस्ट या जैविक खाद बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि खेती की लागत कम हो और मिट्टी का स्वास्थ्य बना रहे। ग्राम स्तर पर मैदानी अमलों के माध्यम से बैठकें कर किसानों को इस दिशा में जागरूक करने अभियान चलाया जा रहा है।

(Bureau Chief, Korba)




