इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय खरपतवार प्रबंधन परियोजना की 33वीं वार्षिक बैठक कल से
रायपुर (BCC NEWS 24): फसलों की पैदावार में खरपतवार (नदी-निवार) एक बड़ी बाधा हैं, जिससे हर साल किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी गंभीर समस्या के समाधान और नवीनतम तकनीकों पर विचार-मंथन करने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में 12 से 14 मई 2026 तक तीन दिवसीय वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया जा रहा है। रायपुर में होने वाली यह बैठक न केवल अनुसंधान के नए द्वार खोलेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ सहित देश भर के किसानों को खरपतवारों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए स्मार्ट कृषि की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
प्रमुख अतिथि और उद्देश्य
अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना की इस 33वीं समीक्षा बैठक के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ए. के. नायक (उप महानिदेशक, (NRM) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली) उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल करेंगे। यह परियोजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के माध्यम से देश भर में चलाई जा रही है, जिसका मुख्य लक्ष्य खरपतवार नियंत्रण की नई तकनीकों का विकास कर उन्हें किसानों तक पहुँचाना है।
देशभर से जुटेंगे 100 से अधिक कृषि विशेषज्ञ
इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 100 वैज्ञानिक शामिल होंगे, जिनमें 17 प्रमुख अनुसंधान केंद्रों के विशेषज्ञ और 7 स्वयंसेवी केंद्रों के प्रतिनिधियों के साथ ही राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU) ICAR संस्थानों और हर्बीसाइड (खरपतवार नाशक) उद्योगों के वैज्ञानिक शामिल होंगे।
भविष्य की रणनीति पर होगा विचार-मंथन
तीन दिनों तक चलने वाले इस सत्र में वैज्ञानिक वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए अनुसंधान कार्यों और विस्तार गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। साथ ही, आगामी दो वर्षों के लिए एक ठोस तकनीकी कार्ययोजना तैयार की जाएगी ताकि खरपतवार प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
क्यों जरूरी है खरपतवार प्रबंधन
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरपतवार का नियंत्रण फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है, जिसे यांत्रिक, सांस्कृतिक, जैविक और रासायनिक तरीकों से किया जा सकता है। प्रमुख उपायों में बुवाई से पहले ग्रीष्मकालीन जुताई, कतारबद्ध बुवाई, निराई-गुड़ाई, मल्चिंग (पलवार) और फसल चक्र अपनाना शामिल है। रासायनिक नियंत्रण के लिए फसल के अनुसार उचित शाकनाशी का उपयोग किया जाना चाहिए।यदि समय पर खरपतवारों का नियंत्रण न किया जाए, तो सामान्य फसलों के उत्पादन में 40 से 60 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। धान की सीधी बोनी के मामले में यह नुकसान 90 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।

(Bureau Chief, Korba)




