रायपुर : गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के नवागांव में ‘‘आम बागवानी’’ को मिली नई उड़ान

              • समेकित उद्यान विकास योजना के तहत 3 हेक्टेयर में होगा रोपण

              रायपुर: राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए उद्यानिकी फसलों के फायदे के प्रति उन्हें जागरूक कर रही है। औषधीय गुण वाले फसलों के साथ ही कम पानी और अधिक आमदनी वाले फल-फूलों की खेती के लाभ के संबंध में किसानों को जानकारी दी जा रही है। वहीं फसल चक्र परिवर्तन के फायदे तथा वैज्ञानिक तकनीक के बारे में भी किसानों को मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में समेकित उद्यान विकास योजना के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम नवागांव में आम की बागवानी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस योजना के तहत कृषक श्री धर्मेन्द्र सिंह कंवर एवं दो अन्य कृषकों द्वारा कुल 3 हेक्टेयर भूमि पर आम के पौध रोपण की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस योजना के अनुसार, किसानों द्वारा उपयुक्त आकार में 300 गड्ढों की खुदाई कर ली गई है, जिसमें बारिश शुरू होते ही संभावित रूप से 25-26 जून के आसपास दशहरी, लंगड़ा, बाम्बेग्रीन और अल्फांजो जैसे उच्च गुणवत्ता वाले आम पौधों का रोपण किया जाएगा।

              इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता जिसमें पौध रोपण पर प्रति हेक्टेयर 10 हजार 938 रूपये का अनुदान, फेंसिंग के लिए 54 हजार 485 रूपये का अनुदान, बोर खनन के लिए 80 हजार रूपये का अनुदान और अंतरवर्ती फसल के लिए 30 हजार रूपये का अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है, बल्कि उन्हें फलोत्पादन जैसी लाभकारी कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित और प्रोत्साहित करना भी है।

              गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के उद्यान विकास अधिकारी ने बताया कि तीसरे वर्ष से प्रत्येक पौधे से औसतन 5 किलोग्राम आम का उत्पादन शुरू होने की संभावना है, जो अगले वर्षों में और बढ़ेगा। विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण, समय-समय पर निरीक्षण और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा, ताकि वे वैज्ञानिक तरीके से आम की खेती कर सकें और अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकें। इस पहल से नवागांव के किसानों के लिए एक नई आर्थिक संभावनाओं का द्वार खुल रही है। आम की व्यावसायिक खेती से किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा साथ ही क्षेत्र में बागवानी संस्कृति को भी बल मिलेगा। स्थानीय स्तर पर फल उत्पादन बढ़ने से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि बाजारों में भी गुणवत्तायुक्त स्थानीय आम की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।


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