- 1 से 15 फरवरी तक संगम नगरी राजिम बनेगी आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
- आइए, आस्था की डुबकी लगाइए, संस्कृति से जुड़िए और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कीजिए।
रायपुर: छत्तीसगढ़ की पावन धरती एक बार फिर आस्था और अध्यात्म के महासंगम का साक्षी बनने जा रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों सहित देशभर के श्रद्धालुओं को राजिम कुंभ (कल्प) में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। उन्होने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार के साथ राजिम पहुँचकर इस दिव्य महापर्व के साक्षी बनें। यह दिव्य एवं भव्य आयोजन 1 फरवरी से 15 फरवरी (माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि) तक आयोजित होगा। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित राजिम, छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल है, जिसे “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” भी कहा जाता है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी यहाँ संतों, महात्माओं, नागा सन्यासियों और लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होगा।
“आस्था, संस्कृति और समरसता का संगम”
राजिम कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है। श्रद्धालु यहाँ संगम में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं, संतों के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा आध्यात्मिक प्रवचनों से जीवन को नई दिशा देते हैं। राजिम का त्रिवेणी संगम प्राचीन काल से साधना और तपस्थली रहा है। यहाँ स्थित राजीव लोचन मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाते हैं। मान्यता है कि संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। राजिम कुंभ (कल्प) का भव्य समापन 15 फरवरी, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होगा।
इस बार आयोजन का मुख्य संदेश भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को जन-जन से जोड़ते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देना है। राजिम कुंभ के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए जा रहे है।

(Bureau Chief, Korba)





