रायपुर : बिहान परियोजना से मिला आत्मनिर्भरता का संबल

              सिलाई सेंटर और मिनी राइस मिल से प्रतिमाह 20 से 30 हजार रुपये की आय

              मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लखपति संवाद कार्यक्रम में किया सम्मानित

              रायपुर (BCC NEWS 24): मुंगेली जिले के पथरिया विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम गोइन्द्री की निवासी श्रीमती शांतामणी गेंदले आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और संघर्ष से सफलता की मिसाल बन गई हैं। कभी आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से जूझने वाली शांतामणी ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास तथा स्व-सहायता समूह के सहयोग से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया है।

              छत्तीसगढ़ राज्य में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) को “बिहान परियोजना” के नाम से संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। इसी परियोजना से जुड़कर शांतामणी गेंदले ने भी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की नई शुरुआत की।

              शांतामणी गेंदले संस्कार महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं और ग्राम संगठन तथा संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान में वे एफएलसीआरपी (वित्तीय साक्षरता सामुदायिक संसाधन व्यक्ति) के रूप में भी कार्य करते हुए ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित लखपति संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।

              कुछ वर्ष पूर्व तक शांतामणी का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण था। सीमित आय और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी साहूकारों से ऋण लेना पड़ता था। ऊंची ब्याज दरों के कारण कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन तब आया जब वे बिहान परियोजना के अंतर्गत संचालित संस्कार महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत की आदत विकसित की और वित्तीय प्रबंधन की बारीकियों को समझा। समूह के माध्यम से उन्हें रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) और सामुदायिक निवेश कोष (सीआईएफ) की सहायता प्राप्त हुई। इसके साथ ही बैंक लिंकेज तथा संकुल स्तरीय संगठन के माध्यम से उन्हें ऋण सुविधा भी मिली, जिससे उन्होंने आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

              प्राप्त ऋण राशि का उपयोग उन्होंने आय बढ़ाने वाले कार्यों में निवेश के रूप में किया। उन्होंने अपने गांव में सिलाई सेंटर प्रारंभ किया, जहां वे सिलाई का कार्य करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने मिनी राइस मिल की स्थापना कर गांव में ही धान कुटाई की सुविधा उपलब्ध कराई। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आज वे प्रतिमाह लगभग 20 हजार से 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

              शांतामणी की उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं हैं। एफएलसीआरपी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने 60 से अधिक स्व-सहायता समूहों को लगभग 1 करोड़ 38 लाख रुपये की ऋण राशि उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अतिरिक्त उन्होंने 30 समूहों को रिवॉल्विंग फंड दिलाने में सहयोग किया तथा 80 से अधिक समूहों को वित्तीय साक्षरता प्रदान कर बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन के प्रति जागरूक बनाया। आज शांतामणी गेंदले न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बनी हैं, बल्कि अपने अनुभव और मार्गदर्शन से अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका यह सफर इस बात का उदाहरण है कि बिहान परियोजना जैसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


                              Hot this week

                              रायपुर : महतारी वंदन योजना : राशि से मनीषा संवार रही बेटी का भविष्य

                              ’बच्ची के पढ़ाई में भी कर रही उपयोग’रायपुर (BCC...

                              रायपुर : हाथ करघे से कमाई तक-ग्राम नारी की महिलाओं की सफलता का राज

                              रायपुर (BCC NEWS 24): ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने...

                              Related Articles

                              Popular Categories