Saturday, January 31, 2026

            रायपुर : लोकगीतों में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा

            • लाला जगदलपुरी मंडप में लोकगीतों का जीवंत विमर्श

            रायपुर: यपुर साहित्य उत्सव 2026 के दूसरे दिन लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा “छत्तीसगढ़ के लोक गीत” प्रदेश की लोक-संस्कृति, भाषा और जनजीवन के गहन संवाद का सशक्त मंच बनी। परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि लोकगीत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक स्मृति और जीवन-दृष्टि की आत्मा हैं।

            लोकगीत सामूहिक स्मृति का जीवंत दस्तावेज : डॉ. पी.सी. लाल यादव

            लोक साहित्य के प्रख्यात लेखक डॉ. पी.सी. लाल यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ी लोकगीत समाज के इतिहास, संघर्ष और अनुभवों को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखने वाले जीवंत दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकगीतों का अमृत कुंड है- खेल, पर्व, नृत्य, वन-जीवन और दैनिक क्रियाओं में लोकगीत सहज रूप से रचे-बसे हैं। हर स्थान और हर अवसर से लोकगीत स्वतः जन्म लेते हैं।

            लोक संवेदना से समृद्ध होता है आधुनिक लेखन : शकुंतला तरार

            वरिष्ठ कवयित्री एवं स्वतंत्र पत्रकार श्रीमती शकुंतला तरार ने कहा कि लोकगीतों की भावनात्मक गहराई आधुनिक साहित्यिक विधाओं को निरंतर समृद्ध करती है। उन्होंने हाइकू रचना में लोक चेतना के प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक संवेदना पीढ़ी दर पीढ़ी विकसित होती रहती है। बस्तर पंडुम जैसे उत्सव आदिवासी समाज की विविधता, सौंदर्य और अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम हैं, जिनसे लोकजीवन की सच्ची तस्वीर सामने आती है।

            भाषा-विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध हैं लोकगीत : डॉ. विनय कुमार पाठक

            हिंदी एवं भाषा विज्ञान में पीएचडी और डी.लिट. की दोहरी उपाधि प्राप्त डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में ध्वनि, लय और अर्थ का अद्भुत संतुलन है, जो इन्हें भाषायी दृष्टि से विशिष्ट बनाता है। उन्होंने कहा कि लोकगीत प्रकृति के अत्यंत निकट होते हैं और इसी निकटता के माध्यम से लोकजीवन अपनी बात सहज रूप में अभिव्यक्त करता है।

            लोककथा और लोकगीत एक-दूसरे के पूरक : डॉ. बिहारी लाल साहू

            कहानीकार डॉ. बिहारी लाल साहू ने कहा कि लोकगीत और लोककथाएँ समाज की आत्मा को अभिव्यक्त करने के दो सशक्त माध्यम हैं। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और लोक साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि पाहुना का मान करना छत्तीसगढ़ की संस्कृति है और लोकगीत हमारी ऐसी अमूल्य संपत्ति हैं, जो हर रूप में हमारे साथ बहती रहती हैं-इन्हें कोई मिटा नहीं सकता।

            संवेदनशील संचालन ने संवाद को दिया प्रवाह

            परिचर्चा का कुशल एवं प्रभावी संचालन सूत्रधार श्री आशीष सिंघानिया, युवा लेखक एवं संस्कृतिकर्मी ने किया। उन्होंने अपने संचालन में वर्तमान समय में बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव के बीच लोकसंस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर भी ध्यान आकृष्ट किया। उनके संचालन ने संवाद को सहज, रोचक और प्रवाहपूर्ण बनाए रखा।

            छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में जीवन और उत्सव

            वक्ताओं ने कहा कि सुआ गीत, करमा गीत, ददरिया, पंथी गीत, बिहाव गीत और जवारा गीत छत्तीसगढ़ की संस्कृति, प्रकृति, श्रम-संस्कृति और उत्सवधर्मिता की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इन गीतों में जनजीवन की खुशियाँ, संघर्ष और आस्था समाहित है।

            छत्तीसगढ़ी साहित्य की पुस्तकों का विमोचन

            इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण छत्तीसगढ़ी साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया गया
            “हमर का बने का गिनहा” – छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल संग्रह
            “दिल म घलो अंधियार हवय” –  छत्तीसगढ़ी गीत एवं कविता संग्रह

            लोक विरासत के संरक्षण का आह्वान

            कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने लोकगीतों के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक हस्तांतरण की आवश्यकता पर बल दिया। परिचर्चा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि लोकगीत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान और भविष्य की सांस्कृतिक दिशा हैं।


                          Hot this week

                          रायपुर : जल जीवन मिशन से बदली ग्राम गुण्डरदेही की दिशा और दशा

                          रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना...

                          रायपुर : छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा 01 फरवरी को

                          व्यापम द्वारा परीक्षार्थियों के लिए दिशा निर्देश जारीप्रथम पाली...

                          रायपुर : मुख्यमंत्री साय नारायणपुर में जवानों से मिले और हौसला बढ़ाया

                          जवानों के साथ किया रात्रि भोजरायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु...

                          रायपुर : वनधन विकास केंद्र से पहाड़ी कोरवा महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता का संबल

                          रायपुर: प्रधानमंत्री जनमन योजना विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) के...

                          Related Articles

                          Popular Categories