Monday, January 12, 2026

              नवविवाहिता की गला दबाकर हत्या… शव को केरोसिन डालकर जलाया, फिर बोरी में डालकर नदी में फेंका; पति, ससुर, देवर और दामाद को आजीवन कारावास

              जांजगीर-चांपा: जिले के सारागांव थाना क्षेत्र में नवविवाहिता की हत्या करने के दोषी पति, ससुर, देवर और दामाद को जिला कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। दोषियों को जिला कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश जून ने सजा सुनाई।

              दोषियों ने नवविवाहिता की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव को केरोसिन तेल डालकर जला दिया था, फिर साक्ष्य छिपाने के लिए लाश को बोरी में भरकर सोन नदी में फेंक दिया था। लोक अभियोजक राजेश पांडेय ने बताया कि रोहित कर्ष निवासी पचोरी ने थाना सारागांव में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी नंदिनी कर्ष (20 वर्ष) 20-21 अगस्त 2021 की दरम्यानी रात घर से बिना बताए कहीं चली गई है।

              जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला।

              जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला।

              रोहित ने बताया कि उसकी शादी नंदिनी से 30 अप्रैल 2021 को हुई थी। शिकायत पर सारागांव थाने में गुम इंसान का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। इसी दौरान 25 अगस्त 2021 को ग्राम कपिस्दा के सोन नदी में एक अज्ञात महिला का शव बोरी में भरा हुआ मिला। बोरी से उसका सिर और हाथ दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस ने बोरी को नदी से निकलवाया। उसकी पहचान नंदनी कर्ष निवासी पचोरी के रूप में हुई।

              दोषियों को जिला कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश जून ने सजा सुनाई।

              दोषियों को जिला कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश जून ने सजा सुनाई।

              जांच के दौरान पुलिस को ससुराल वालों की भूमिका संदिग्ध लगी, वहीं मायके वालों ने भी ससुराल वालों पर बेटी की हत्या का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने पति रोहित कर्ष, ससुर रामधन कर्ष, देवर मोहित कर्ष और दामाद माखन बरेठ को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पुलिस की पूछताछ में सभी आरोपी टूट गए और अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि पारिवारिक विवाद में उन्होंने नंदिनी की गला दबाकर हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए शव के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया। इसके बाद लाश को बोरी में भरकर सोन नदी के पुल से नीचे फेंक दिया।

              जुर्म कबूल करने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। सभी आरोपियों के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। डेढ़ साल से ज्यादा की सुनवाई में सभी आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई।


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