Monday, February 16, 2026

              SUPREME COURT NOTICE : पतंजलि को सुप्रीम कोर्ट से अवमानना का नोटिस, भ्रामक विज्ञापन मामले में कहा- देश को धोखा दिया जा रहा, सरकार आंख मूंद कर बैठी है

              नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में पतंजलि आयुर्वेद और उसके MD आचार्य बालकृष्ण को अवमानना ​​नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि आप में (पतंजलि) कोर्ट के आदेश के बाद भी यह विज्ञापन लाने का साहस रहा।

              अब हम सख्त आदेश पारित करने जा रहे हैं। हमें ऐसा इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि आप कोर्ट को उकसा रहे हैं। कोर्ट ने सरकार के खिलाफ भी सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा- पूरे देश को धोखा दिया जा रहा है और सरकार आंख मूंद कर बैठी है।

              केस की अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी
              IMA की ओर से कोर्ट में पेश हुए सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया ने कहा कि पतंजलि ने योग की मदद से मधुमेह और अस्थमा को ‘पूरी तरह से ठीक’ करने का दावा किया था। कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 मार्च को तय की है।

              इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 2022 में पतंजलि के खिलाफ ये याचिका दायर की थी। IMA की शिकायत के अनुसार बाबा रामदेव सोशल मीडिया पर एलोपेथी के खिलाफ गलत जानकारी फैला रहे हैं।

              10 जुलाई, 2022 को पब्लिश पतंजलि वेलनेस के विज्ञापन की तस्वीर। एडवर्टाइजमेंट में एलोपैथी पर "गलतफहमियां" फैलाने का आरोप लगाया गया था।

              10 जुलाई, 2022 को पब्लिश पतंजलि वेलनेस के विज्ञापन की तस्वीर। एडवर्टाइजमेंट में एलोपैथी पर “गलतफहमियां” फैलाने का आरोप लगाया गया था।

              हर एक प्रोडक्ट के झूठे दावे पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगा सकता है
              इससे पहले 21 नवंबर 2023 को हुई सुनवाई में जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा था- पतंजलि को सभी भ्रामक दावों वाले विज्ञापनों को तुरंत बंद करना होगा। कोर्ट ऐसे किसी भी उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लेगा और हर एक प्रोडक्ट के झूठे दावे पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगा सकता है।

              कोर्ट एलोपैथी बनाम आयुर्वेद’ की बहस नहीं बनाना चाहती
              कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पतंजलि आयुर्वेद भविष्य में ऐसा कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेगा और यह भी सुनिश्चित करेगा कि प्रेस में उसकी ओर से इस तरह के कैज़ुअल स्टेटमेंट न दिए जाएं। बेंच ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को ‘एलोपैथी बनाम आयुर्वेद’ की बहस नहीं बनाना चाहती बल्कि भ्रामक चिकित्सा विज्ञापनों की समस्या का वास्तविक समाधान ढूंढना चाहती है।

              बाबा रामदेव को अन्य प्रणालियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए
              इससे पहले हुई सुनवाई में भारत के तत्कालीन चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने तब कहा था ‘बाबा रामदेव अपनी चिकित्सा प्रणाली को लोकप्रिय बना सकते हैं, लेकिन उन्हें अन्य प्रणालियों की आलोचना क्यों करनी चाहिए। हम सभी उनका सम्मान करते हैं, उन्होंने योग को लोकप्रिय बनाया, लेकिन उन्हें अन्य प्रणालियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए।’

              कोविड की दवा बनाने के दावे को लेकर घिरी थी पतंजलि
              रामदेव बाबा ने दावा किया था कि उनके प्रोडक्ट कोरोनिल और स्वसारी से कोरोना का इलाज किया जा सकता है। इस दावे के बाद कंपनी को आयुष मंत्रालय ने फटकार लगाई और इसके प्रमोशन पर तुरंत रोक लगाने को कहा था।

              • 2015 में कंपनी ने इंस्टेंट आटा नूडल्स लॉन्च करने से पहले फूड सेफ्टी एंड रेगुलेरिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से लाइसेंस नहीं लिया था। इसके बाद पतंजलि को फूड सेफ्टी के नियम तोड़ने के लिए लीगल नोटिस का सामना करना पड़ा था।
              • 2015 में कैन्टीन स्टोर्स डिपार्टमेंट ने पतंजलि के आंवला जूस को पीने के लिए अनफिट बताया था। इसके बाद सीएसडी ने अपने सारे स्टोर्स से आंवला जूस हटा दिया था। 2015 में ही हरिद्वार में लोगों ने पतंजलि घी में फंगस और अशुद्धियां मिलने की शिकायत की थी।
              • 2018 में भी FSSAI ने पतंजलि को मेडिसिनल प्रोडक्ट गिलोय घनवटी पर एक महीने आगे की मैन्युफैक्चरिंग डेट लिखने के लिए फटकार लगाई थी।
              • कोरोना के अलावा रामदेव बाबा कई बार योग और पतंजलि के प्रोडक्ट्स से कैंसर, एड्स और होमोसेक्सुअलिटी तक ठीक करने के दावे को लेकर विवादों में रहे हैं।

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