BIG NEWS: यूरोपीय यूनियन ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते को मंजूरी दी, अगले हफ्ते दिल्ली में डील होगी

              ब्रुसेल्स: यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते (सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट) को मंजूरी दे दी है। अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर साइन होंगे।

              EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने बुधवार को यूरोपीय संसद में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा यह साझेदारी एक बड़े रणनीतिक एजेंडे का हिस्सा होगी।

              इस एजेंडे में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता (FTA), डिफेंस एंड सिक्योरिटी डील, साइबर सिक्योरिटी, समद्री सुरक्षा और काउंटर टेररिज्म शामिल है।

              यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत आ रहे हैं। वे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। भारत-EU शिखर सम्मेलन अगले दिन 27 जनवरी को होगा।

              EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट को मंजूरी देने का ऐलान किया।

              EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट को मंजूरी देने का ऐलान किया।

              कलास बोलीं- एग्रीमेंट आतंकवाद से मुकाबले में मददगार

              कलास ने बताया कि भारत और EU के बीच सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट से आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे समुद्री सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी जैसे सेक्टर्स में सहयोग बढ़ेगा।

              कलास ने कहा कि यूरोप भारत के साथ एक नए और मजबूत एजेंडे पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत, यूरोप की आर्थिक मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता जा रहा है।

              भारत आ रहे EU के प्रतिनिधिमंडल में लगभग 90 सदस्य शामिल होंगे। इनमें काजा कलास, ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविक और कई डायरेक्टर्स रहेंगे।

              भारत-EU में ट्रेड डील भी संभव

              भारत और EU के बीच 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन हो सकते हैं। इसके लिए दोनों देश कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करेंगे।

              पहले यूरोपीय संसद को हां करनी होगी। यूरोपीय काउंसिल की मंजूरी के बाद ट्रेड कमिश्नर सेफकोविक इसे भारत के सामने साइन के लिए पेश करेंगे।

              समिट के दौरान भारत और EU 2030 तक के लिए एक राजनीतिक एजेंडा भी पेश करेंगे।

              मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल दोनों देश अभी कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे विवादित मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए बात कर रहे हैं।

              CBAM के तहत स्टील और सीमेंट जैसे उत्पादों पर कार्बन टैरिफ के लिए बनाए गए नियम है। अगर कोई देश बहुत प्रदूषण करके सामान बनाता है। फिर उसे यूरोप में लाया जाता है, तो यूरोप उस पर अतिरिक्त टैक्स लगाता है।

              EU ने इस पॉलिसी को लेकर अब तक कोई बदलाव नहीं किया है। दोनों देश इसका हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

              EU-भारत का साथ मिलकर आना फायदेमंद

              कलास ने कहा है कि आज की खतरनाक दुनिया में मिलकर काम करना दोनों के लिए फायदेमंद होगा। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बाजार खुलेगा, जिससे देशों के सामान पर टैक्स और रुकावटें कम होंगी।

              इसकी वजह से ज्यादा कंपनियां और व्यापारी एक-दूसरे के देश में सामान बेच और खरीद सकते हैं। जिससे निर्यात भी बढ़ेगा। इसके अलावा तकनीक, दवा और सेमीकंडक्टर के सहयोग में भी मदद होगी।

              नौकरी और पेशेवरों की आवाजाही इस नए एजेंडे का तीसरा हिस्सा है। कलास ने बताया कि दोनों देश सीजनल वर्कर्स, स्टूडेंट्स, शोधकर्ताओं और कुशल कामगार की आवाजाही आसान करने के लिए भी समझौता करेंगे। इससे तकनीक और रिसर्च में सहयोग बढ़ेगा।

              EU, भारत का बड़ा बिजनेस पार्टनर

              EU विदेश नीति प्रमुख ने कहा कि EU भारत का बड़ा बिजनेस पार्टनर है।

              2023–24 में भारत और यूरोप के बीच व्यापार 135 बिलियन डॉलर का रहा था। अगर मुक्त व्यापार समझौते पर सहमित बनती है, तो दोनों देशों के व्यापार को बड़ा बूस्ट-अप मिलेगा। दोनों पक्ष बातचीत पूरी होने की घोषणा करने वाले हैं। इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता माना जा रहा है।

              EU के लिए भारत इसलिए भी जरुरी है, क्योंकि वह चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है। ऐसे में वह भारत जैसे भरोसेमंद देशों से मजबूत रिश्ते बनाना चाहता है। भारत के लिए EU तक नजदीकी पहुंच से निर्यात बढ़ाने और निर्माण क्षेत्र को बढ़ाने में मदद मिलेगी।


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