Tuesday, February 24, 2026

              CG NEWS: रीपा के जरिए भ्रष्टाचार का मामला… बल्ब इकाई के नाम पर लाखों रुपए का घोटाला, आधी-अधूरी संचालित यूनिट से खरीदवाएं बल्ब

              गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: जिले में रीपा के जरिए भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। अधिकारियों के द्वारा रीपा में बल्ब इकाई के नाम पर आधी अधूरी संचालित यूनिट से लाखों रुपए के बल्ब खरीदवाने के कारनामे को अंजाम दिया है।

              दरअसल, मरवाही जनपद पंचायत के अंतर्गत डोंगरिया गांव में पूर्व की कांग्रेस सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रीपा के तहत एलइडी और सोलर लाइट इकाई की स्थापना की गयी। इसका संचालन समूह के माध्यम से होता है। अभी यह यूनिट ठीक से शुरू भी नहीं हो सकी है और अक्सर यहां ताला ही लटका रहता है। यह अक्सर बंद ही दिखाई देता है।

              जिला पंचायत डीआरडीए के माध्यम से आदेश जारी किया गया कि जिले की ग्राम पंचायतों को इसी यूनिट से सोलर लाइट और एलइडी लाइट खरीदी जाए। इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि इस समूह से सोलर लाइट और एलइडी खरीदने से शासन की योजना का सफल क्रियान्वयन हो सके।

              यूनिट के नाम पर लाखों का घोटाला।

              यूनिट के नाम पर लाखों का घोटाला।

              यूनिट के नाम पर लाखों का घोटाला

              अधिकारियों के इसी आदेश और दबाव के चलते अब ग्राम पंचायतों में इसी यूनिट के माध्यम से लाखों की खरीदी किया जाना बताया जा रहा है, जबकि हकीकत में यह यूनिट का संचालन समुचित तरीके से नहीं हो रहा है। ऐसे में जिले की ग्राम पंचायतों में लाखों रुपयों की खरीदी बिना टेंडर के और इस यूनिट के नाम पर करते हुए लाखों का घोटाला किया जा रहा है।

              प्रशिक्षण की अवधि 300 दिन

              हद तो तब हो गयी जब इस यूनिट के रीपा समूह को कलेक्टर द्वारा डीएमएफ के तहत समूह को बल्ब बनाने और उत्पादन के लिये प्रशिक्षण दिए जाने के नाम पर 19 लाख 79 हजार रुपये की राशि जनपद पंचायत मरवाही के सीईओ को जारी किया गया। 2 अगस्त 2023 को जारी पत्र के अनुसार इस प्रशिक्षण की अवधि 300 दिन की होगी। लेकिन अब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं हुआ है।

              डीएमएफ के तहत समूह को बल्ब बनाने और उत्पादन के लिये प्रशिक्षण के नाम पर जारी किए गए राशि।

              डीएमएफ के तहत समूह को बल्ब बनाने और उत्पादन के लिये प्रशिक्षण के नाम पर जारी किए गए राशि।

              इस मामले में पहले सीईओ के द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता, तब उत्पादन होता और उसके बाद खपत होती। पर यहां सब एक साथ हो रहा है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिये रीपा का आड़ लिया गया और इस घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।

              इसे लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं अधिकारी अब अपनी दलील देकर बचते नजर आ रहे है, जबकि समिति के लोग खुद कह रहे हैं कि दशहरा के पहले से ही यूनिट बंद पड़ी है। अगर सप्लाई होती तो हमें इसकी जानकारी होती।


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