Monday, April 15, 2024
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BCC News 24: CG न्यूज़- बिलासपुर में चीतल का शिकार, शिकारी फरार.. वन विकास निगम की टीम ने मारा छापा, टॉयलेट में मांस छिपाकर भागे; खरीदार गिरफ्तार

छत्तीसगढ़: बिलासपुर में चीतल का शिकार कर उसके मांस को बेचने का मामला सामने आया है। शिकारियों के मांस बेचने की जानकारी मिलते ही वन विकास निगम की टीम ने गांव में दबिश दी। इससे पहले ही शिकारियों को खबर मिल गई और वे टॉयलेट में चीतल का मांस छिपाकर भाग निकले। डॉग स्क्वायड की मदद से विभाग के अफसरों ने मांस खरीदने वाले को पकड़ लिया है। जबकि, दो शिकारियों की तलाश की जा रही है। मामला कोटा वन विकास निगम के वन परिक्षेत्र भैंसाझार का है।

वन विकास निगम के कर्मचारियों को गुरुवार को सूचना मिली कि ग्राम मेंड्रापारा में चीतल का शिकार कर दो लोग मांस की बिक्री कर रहे हैं। खबर मिलते ही कर्मचारियों की टीम गांव पहुंच गई। इस दौरान उन्होंने जानकारी जुटाई, तब पता चला कि जिस जगह पर चीतल का मांस बेचा जा रहा था वहां कोई नहीं है। मकान की तलाशी लेने पर पता चला कि शिकारियों ने मांस को टॉयलेट में छिपा दिया है। टीम ने चीतल के मांस को जब्त किया और जांच के लिए डॉग स्क्वायड की मदद ली।

डॉग स्क्वायड की मदद से खरीदार पकड़ाया
डॉग स्क्वायड की टीम गांव पहुंची। उसने टॉयलेट में बोरियों में छिपाकर रखे मांस को सूंघा और कर गांव के एक घर में पहुंच गया। जहां वन कर्मियों ने पूछताछ की, तो पता चला कि उन्होंने 100 रुपए किलो में मांस खरीदा था। टीम ने मांस के खरीदार श्यामलाल को पकड़ लिया। उसके खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। पूछताछ में श्यामलाल ने बताया कि उसने गांव के ही दुर्गेश और रोहित चीतल का मांस खरीदा है। टीम ने उनके घर में दबिश दी, लेकिन दोनों फरार हो गए थे।

कहां और कैसे हुआ शिकार, विभाग को नहीं मिली जानकारी
वन विकास निगम के अधिकारियों ने बताया कि शुरूआती जांच में चीतल का शिकार कर मांस बेचने की जानकारी मिली थी। जांच में चीतल का मांस बेचने की पुष्टि हो गई है। अधिकारिक जांच के लिए मांस का सैंपल लेकर लैब भेजा जाएगा। शिकारियों ने चीतल का शिकार कहां और कैसे किया है। इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। अफसरों का कहना है कि शिकारियों के पकड़े जाने के बाद इसका खुलासा हो सकेगा।

आए दिन होता है शिकार
बताया जा रहा है कि भैंसाझार रेंज में चीतलों का झुंड विचरण करता है, जिसे मौका मिलते ही शिकारी मार डालते हैं। क्षेत्र में पहले भी इस तरह से चीतलों का शिकार किया जा चुका है। इसके बाद भी वन विकास निगम का अमला गांव और आसपास के जंगल में झांकने तक नहीं जाता। इसके चलते शिकारियों का हौसला बुलंद है।

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