कोलकाता: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को कहा कि किसी भी पात्र वोटर का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिकता है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मकसद है कि सभी सही वोटर को वोट देने का अधिकार मिले और कोई अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न हो।
आयोग का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पश्चिम बंगाल के सभी मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में हिंसा और डर के माहौल से मुक्त होकर मतदान कर सकें।
कोलकाता में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए दो दिन तक हुई बैठकों के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बिना किसी पक्षपात और दबाव के कानून का सख्ती से पालन कराएं। इसके बाद वे दिल्ली रवाना हो गए। मुख्य चुनाव आयुक्त के लौटते ही पांच दिन से धरने पर बैठीं CM ममता बनर्जी ने धरना खत्म कर दिया।
कुमार बोले- “चुनाओ पर्वो, पश्चिमबंगेर गर्वो”
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां मतदान प्रतिशत हमेशा काफी अधिक रहता है। राज्य के मतदाता संविधान का सम्मान करते हैं और शांतिपूर्ण चुनाव में विश्वास रखते हैं।
इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग का एक नारा भी बताया- “चुनाओ पर्वो, पश्चिमबंगेर गर्वो” (यानी चुनाव का पर्व पश्चिम बंगाल का गर्व है)।
इसके पहले ज्ञानेश कुमार को सुबह फिर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। ज्ञानेश कुमार दक्षिणेश्वर काली मंदिर गए थे, जहां लोगों की भीड़ ने गो बैक नारे लगाए और काले झंडे दिखाए।
यह लगातार तीसरे दिन CEC को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले कालीघाट मंदिर में दर्शन करने और रविवार रात कोलकाता पहुंचने पर भी एयरपोर्ट के बाहर लोगों ने काले झंडे दिखाए थे।
चुनाव आयुक्त के विजिट की तस्वीरें…

चुनाव आयुक्त मंगलवार को सबसे पहले दक्षिणेश्वर काली मंदिर गए।

CEC ज्ञानेश कुमार ने बेलूर मठ का भी दौरा किया।


विरोध कर रहे लोगों ने गो बैक ज्ञानेश कुमार और लोकतंत्र के हत्यारे के पोस्टर दिखाए।
SIR पर कहा- प्रक्रिया नियमों के अनुसार
कुमार ने बताया कि (SIR) की प्रक्रिया पूरे देश में संवैधानिक नियमों के अनुसार चल रही है।
इस प्रक्रिया में पाया गया कि:
- लगभग 4–5% मतदाता 2002 की वोटर लिस्ट से खुद को जोड़ नहीं पाए।
- करीब 7–8% मतदाताओं ने गलती से या जानबूझकर गलत तरीके से अपने नाम जोड़े।
- जिन लोगों के नाम हट गए हैं वे फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
- जिन नामों की अभी जांच चल रही है, उनकी जांच हाईकोर्ट के नियुक्त किए गए न्यायिक अधिकारियों के जरिए की जा रही है।
विरोध के बावजूद CEC की मीटिंग
CEC कुमार ने विरोध के बावजूद, कुमार राज्य में अपने तय प्रोग्राम में शामिल होते रहे। इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ, राज्य में चुनाव से जुड़े इंतजामों का आकलन करने के लिए पश्चिम बंगाल की चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती, डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) पीयूष पांडे और दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ मीटिंग की।
चुनाव आयुक्त ने हावड़ा जिले के बेलूर मठ का भी दौरा किया और कहा कि पोल पैनल पश्चिम बंगाल में हिंसा-मुक्त चुनाव के लिए कमिटेड है।
उन्होंने कहा कि आयोग यह पक्का करने की कोशिश करेगा कि वोटर त्योहार के माहौल में अपने वोट का इस्तेमाल कर सकें। चुनाव बिना हिंसा या डर-धमकी के हों।
विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी में
विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। यदि संसद में यह लाया जाता है, तो किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ पहला प्रस्ताव होगा।
नोटिस का मसौदा इसी हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने बताया कि कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के अन्य दल नोटिस का समर्थन करेंगे। प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर के मुद्दे पर वोटर्स के नाम काटे जाने के मुद्दे पर ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाने की बात कही थी।
प्रक्रिया: लोस में 100, रास में 50 सांसद का साथ जरूरी है
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जज को हटाने जैसी है। बस, आयुक्त का गलत व्यवहार या अयोग्यता साबित होनी चाहिए।
प्रस्ताव किसी भी सदन में लाया जा सकता है। नोटिस पर लोकसभा में 100, राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।
समिति नोटिस की जांच करती है। प्रस्ताव बहुमत से पारित होना चाहिए। सदन में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों का दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव का समर्थन करना जरूरी होता है।

(Bureau Chief, Korba)




