वल्क वेस्ट जनरेटरों को उनके यहाॅं उत्सर्जित कचरे के उपचार, निस्तारण व प्रबंधन की दी गई विस्तृत जानकारी
उच्चतम न्यायालय के निर्देश एवं भारत सरकार द्वारा लागू किये गये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रावधानों के कराया गया अवगत
कोरबा (BCC NEWS 24): आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय ने नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रांतर्गत स्थित वल्क वेस्ट जनरेटरों का मार्गदर्शन करते हुये आज कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत वल्क वेस्ट जनरटरों को अपने प्रतिष्ठानों, संस्थानों में उत्सर्जित कचरे के उपचार, प्रस्ंास्करण व प्रबंधन की जिम्मेदारी उनकी स्वयं की है, अतः वे इस हेतु निर्धारित प्रावधानों का पालन करें, उन्होने कहा कि वर्ष 2016 के नियमों को अपडेट करते हुये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू किया गया है, माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर भारत सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 को 01 अप्रैल 2026 से लागू किया गया है, जिसका पालन करना अनिवार्य है।
सचिव नगरीय प्रशासन विकास विभाग छत्तीसगढ़ शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के तहत आज नगर पालिक निगम केारबा के मुख्य प्रशासनिक भवन साकेत स्थित सभाकक्ष में निगम क्षेत्र के वल्क वेस्ट जनरेटरों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर भारत सरकार द्वारा लागू किये गये ठोस अपशिष्ट नियम 2026 के प्रावधानों से अवगत कराते हुये वल्क वेस्ट जनरेटरों को उनके यहाॅं उत्सर्जित अपशिष्ट के प्रबंधन एवं इस हेतु निहित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी उन्हें प्रदान की गई। बैठक को संबोधित करते हुये आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय ने वल्क वेस्ट जनरेटरों का मार्गदर्शन करते हुये कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में वल्क वेस्ट जनरेटरों को नये सिरे से चिन्हांकित किया गया है तथा उनके यहाॅं उत्सर्जित अपशिष्ट के निपटान व प्रबंधन के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर सभी आवश्यक प्रावधान किये गये हैं, अतः सभी वल्क वेस्ट जनरेटर इन प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन करें। उन्होने आगे कहा कि हमें अपने शहर की, अपने गली मोहल्ले व अपने घर की स्वच्छता के प्रति एलर्ट रहना है, स्वच्छता हम सबकी सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय होना चाहिये, हम अपने प्रतिष्ठान, संस्थान, दुकान को स्वच्छ रखें, उत्सर्जित कचरे का नियमानुसार प्रबंधन करें तथा औरो को भी इसके लिये प्रेरित करें।
बल्क वेस्ट जनरेटर चिन्हाकित
निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.संजय तिवारी ने उपस्थित वल्क वेस्ट जनरेटरों को जानकारी देते हुये बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में बल्क वेस्ट जनरेटरों को नये सिरे से चिन्हाकित किया गया है, जिसके अनुसार भारी मात्रा में अपशिष्ट जनरेट करने वाली वे इकाईयाॅं जो इन मानदण्डों में से कम से कम एक को पूरा करती हो, यथा 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भवन या प्रतिदिन 40 हजार लीटर पानी की खपत या प्रतिदिन 100 किलोग्राम ठोस अपशिष्ट का उत्सर्जन सम्मिलित हंै, इसके तहत केन्द्रीय सरकार के विभाग या उपक्रम, राज्य सरकार के विभागों या उपक्रमों के द्वारा अधिग्रहित भवन, स्थानीय निकाय द्वारा अधिग्रहित भवन, पब्लिक सेक्टर उपक्रम या निजी कम्पनियाॅं, स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय अन्य शैक्षणिक संस्थान और सामुदायिक स्थान या उस जैसे स्थान शामिल हैं। इसी प्रकार रेलवे, बस स्टैण्ड या डिपो, विमान पत्तन सहित वाणिज्यिक स्थापनाएं, औद्योगिक इकाईयाॅं और औद्योगिक क्षेत्र, माल, मल्टीप्लेक्स, होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, छात्रावास, कृषि और बागवानी उत्पादों, मछली और मांस के लिये मण्डियों सहित थोक बाजार, स्टेडियम, खेल परिसर, सामुदायिक हाल, कन्वंेशन हाल, आडिटोरियम, विवाह या भोज हाल, सम्मेलन केन्द्र, एक्सपो सेल्टर, प्रदर्शनी क्षेत्र व पर्यटन स्थल आदि वाणिज्यिक उपयोक्ता व आवासीय सोसायटी शामिल हैं।
कार्यक्रम आयोजन की सूचना 03 दिन पूर्व देनी आवश्यक
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि कोई भी व्यक्ति अग्रिम रूप से कम से कम 03 कार्य दिवस पहले स्थानीय निकाय को सूचित किये बिना किसी भी गैरअनुज्ञप्ति वाले स्थान पर 100 व्यक्तियों से अधिक का कोई आयोजन व समारोह आयोजित नहीं करेगा अर्थात आयोजन से 03 दिन पूर्व निगम का सूचना देगा तथा ऐसा व्यक्ति या आयोजक यह सुनिश्चित करेगा कि अपशिष्ट का स्त्रोत पर पृथक्करण हों एवं पृथक किये गये अपशिष्ट को स्थानीय निकाय द्वारा निर्धारित यूजर चार्जेज की राशि जमा कराने के पश्चात एजेंसी को या अभिकरण को सौप दिया जाए तथा इस उत्पन्न अपशिष्ट का नियमानुसार निस्तारण किया जाए। इसके अतिरिक्त अपशिष्ट प्रबंधन व निस्तारण के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अंतर्गत प्रदान किये गये हैं।
अपशिष्ट को 04 श्रेणियों में रखा गया
केन्द्र सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 को अपडेट करते हुये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 बनाया तथा इसे दिनांक 01 अप्रैल 2026 से समस्त नगरीय निकायों में लागू कर दिया गया है। इस नियम के अनुसार पूर्व की 02 श्रेणियों में सूखा व गीला अपशिष्ट के पृथककरण के स्थान पर अब अपशिष्ट पृथककरण को 04 श्रेणियों गीला, सूखा, स्वच्छता व विशेष देखभाल आदि श्रेणियों में बांटा गया है।
04 श्रेणियों के अपशिष्ट हेतु 04 पृथक रंग के डस्टबिन
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अंतर्गत 04 श्रेणी के कचरों के लिये हरे, नीले, लाल व बैंगनी रंग के डस्टबिन निर्धारित किये गये हैं, जिसके अनुसार हरे रंग के डस्टबिन में गीला कचरा यथा रसोई का कचरा, सब्जी फल के छिल्ले, बचा हुआ खाना, फूल पत्ते, चायपत्ती आदि रखें जायेंगे, इसी प्रकार नीले डिब्बे में सूखा कचरा यथा कागज, गत्ता, प्लास्टिक बोतले, कांच, धातु, रबर, बेकार कपडे़, तो वहीं लाल रंग के डस्टबिन में सेनेटरी नेपकिन, डायपर, पट्टी, बैंडडेज आदि लपेटकर अलंग रखने होंगे, इसी प्रकार बैंगनी रंग के डिब्बे में विशेष देखभाल अपशिष्ट दवाईयाॅं, इंजेक्शन, बैटरी, इलेक्ट्रानिक समान, सी.एफ.एल. बल्ब, पेंट के डिब्बे, कीटनाशक, रसयान आदि के डिब्बे रखें जायेंगे। इन नियम में मिश्रित कचरा देने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति का प्रावधान भी रखा गया है।
उल्लंघन पर कार्यवाही
वल्क वेस्ट जनरेटर द्वारा यदि निहित प्रावधानों के अनुरूप अपने यहाॅं उत्सर्जित कचरे का प्रबंधन नहीं करता व अन्य कर्तव्यों से विमुख होता है तो पर्यावरण संरक्षण मण्डल, कलेक्टर व नगर निगम पर्यावरण विधि की धारा 05 के अंतर्गत या विभिन्न प्रावधानों व निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुये वल्क वेस्ट जनरेटर के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही कर सकते हैं, वल्क वेस्ट जनरेटरों से यह पूर्ण अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कर्तव्यों का निष्ठा के साथ निवर्हन करें।
05 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल के लिये प्रावधान
स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.तिवारी ने बताया कि निहित प्रावधानों के अनुसार 05 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले सभी होटल, रेस्टोरेंट, निवासी कल्याण, बाजार संघ और गेट लगे समुदाय, सोसायटी एवं संस्थान निगम के साथ भागीदारी में इन नियमों के तहत अपशिष्ट स्त्रोत पर कचरे का पृथककरण सुनिश्चित करेंगे, पृथक-पृथक अपशिष्ट संग्रहण की सुविधा प्रदान करेगे, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अधिकृत अपशिष्ट उठाने वालों या अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं को सौपेगें, इसी प्रकार जैव अपशिष्ट को यथासंभव परिसर के भीतर खाद या जैवमीथेनेशन के माध्यम से निपटान करेंगे। सम्पन्न बैठक के दौरान स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.संजय तिवारी के साथ ही व्ही.के.सारस्वत, यासीन अली रिजवी, आशुतोष कुमार, हर्षा कुसरो, अनुप अग्रवाल, सुजित सिंह, तारामणी तिग्गा, कुणाल रजक, जयंत सोनी, श्याम सिंह, अशोक सेन, चंचल कवाडे़, पदम सिंह चंदेल, सौरभ तिवारी, विकास वाधवानी, लालबाबु चैधरी, तेजपाल चैधरी, गुरमीत सिंह, एन.के.सिंह, राजकुमार साहू आदि के साथ अन्य लोग उपस्थित थे।

(Bureau Chief, Korba)




