नई दिल्ली: AAP सांसद संजय सिंह ने रविवार को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को याचिका सौंपकर BJP में शामिल हुए 7 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। सिंह ने कहा कि इन सदस्यों का पार्टी छोड़ना दलबदल विरोधी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
संजय सिंह के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने अधिवक्ता कपिल सिब्बल और लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी अचारी सहित कई संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ली है।
AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल, राजेंदर गुप्ता ने शुक्रवार को BJP जॉइन कर ली थी।
AAP छोड़ते ही राघव चड्ढा के 19 लाख इंस्टाग्राम-फॉलोअर्स घटे
इस बीच राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम पर करीब 19 लाख फॉलोअर्स कम हो गए हैं। 48 घंटे पहले उनके फॉलोअर 14.6 मिलियन (1 करोड़ 46 लाख) थे। रविवार दोपहर तक यह 12.7 मिलियन (1 करोड़ 32 लाख) बचे हैं।
राघव चड्ढा के फॉलोअर्स, शुक्रवार शाम तक

रविवार दोपहर को

स्वाति मालीवाल बोलीं- केजरीवाल महिला विरोधी हैं
स्वाति मालीवाल ने AAP और अरविंद केजरीवाल पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 2006 से केजरीवाल के साथ काम किया, हर आंदोलन में साथ दिया, लेकिन बाद में उनके साथ पार्टी में दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर में उनके साथ मारपीट कराई गई और FIR वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। मालीवाल ने कहा कि उन्हें दो साल तक संसद में बोलने का मौका नहीं दिया गया जो बेहद शर्मनाक है।
जानिए, 7 सांसदों के AAP छोड़ने की क्या वजहें रहीं
राघव चड्ढा: राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के वक्त चुप्पी साधे रखी और इलाज की बात कहकर विदेश में रहे। तब से केजरीवाल व शीर्ष नेतृत्व उनसे नाराज चल रहा था। राघव चड्ढा संसद में लगातार अपना काम करते रहे।
डॉ. संदीप पाठक: संदीप पाठक को पार्टी में अहम जिम्मेदारी दी गई थी। पंजाब, गोवा और गुजरात में पार्टी के विस्तार के लिए काम करते रहे। दिल्ली में हार के बाद उनकी जगह मनीष सिसोदिया को पंजाब की जिम्मेदारी दे दी गई। केजरीवाल ने कुछ समय से पाठक को पार्टी की अहम बैठकों से दूर रखना शुरू कर दिया था।
स्वाति मालीवाल: स्वाति मालीवाल और अरविंद केजरीवाल में सीधे लड़ाई थी। स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल के नजदीकी वैभव कुमार पर मारपीट के आरोप लगाए। मालीवाल ने कहा था कि यह सब केजरीवाल के सामने हुआ। केजरीवाल ने उसका साथ देने के बजाय वैभव कुमार का साथ दिया।
अशोक मित्तल: अशोक मित्तल को पार्टी ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया और उसके बाद उनके ठिकानों पर ईडी की रेड हुई। ईडी की रेड के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया और न ही उनके लिए कोई स्टैंड लिया। पार्टी नेताओं के इस रवैये से वो भी नाराज थे।
हरभजन सिंह: हरभजन सिंह को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सदस्य तो बनाया लेकिन उन्हें कभी पार्टी फोरम में कोई तवज्जो नहीं दी। हरभजन सिंह पार्टी की गतिविधियों में कभी शामिल नहीं हुए। यह भी चर्चा है कि अहम पदों पर नियुक्तियों में उनकी राय नहीं ली जाती थी और न ही उन्हें कुछ पूछा जाता था।
राजिंदर गुप्ता: राजिंदर गुप्ता पंजाब के बड़े उद्योगपति हैं। सरकारें उन्हें इंडस्ट्री से जुड़े उपक्रमों में जरूर रखती हैं। आम आदमी पार्टी ने जब राज्यसभा सदस्य संजीव अरोड़ा को लुधियाना पश्चिमी से उपचुनाव लड़वाया तो उनकी ही सिफारिश पर राजिंदर गुप्ता को राज्यसभा सदस्य बनाया गया।
विक्रमजीत सिंह साहनी: विक्रमजीत सिंह साहनी बड़े उद्योगपति, समाज सेवी हैं। पार्टी फोरम में उन्हें भी कोई तव्वजो नहीं दी गई। यही वजह उनके पार्टी छोड़ने की रही।

(Bureau Chief, Korba)




