BIG NEWS: ट्रम्प ने भारत को नरक बताने वाला पोस्ट शेयर किया, कहा- भारतीय अमेरिका में बच्चों को जन्म देकर नागरिकता लेते हैं, फिर परिवार बुलाते हैं

              वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक पोस्ट को शेयर किया है, जिसमें भारत और चीन को हेल होल (नरक का द्वार) बताया गया है। यह चिट्ठी कट्टरपंथी अमेरिकी लेखक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज की है, जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता देने की आलोचना की गई है और भारत-चीन समेत कई देशों पर विवादित टिप्पणी की गई है।

              इसमें लिखा गया है कि प्रवासी जन्म के आधार पर अपने बच्चों को नागरिकता दिलाते हैं। फिर पूरा परिवार अमेरिका आ जाता है। इसमें बर्थराइट कानून की आलोचना करते हुए कहा गया है कि इसका फैसला अदालतों या वकीलों से नहीं, बल्कि देशव्यापी वोटिंग से होना चाहिए।

              इस चिट्ठी के साथ सैवेज का वीडियो भी टैग है। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय की भी प्रतिक्रिया आई है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा- फिलहाल मैं बस इतना ही कहूंगा कि हमने इसे जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स देखी हैं।

              ट्रम्प ने 22 दिन पुराने वीडियो का टेक्स्ट शेयर किया

              इस वीडियो को माइकल सैवेज ने 1 अप्रैल को अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया था। इसमें कही गई बातों को ट्रम्प ने 4 पन्नों में ट्रुथ सोशल पर शेयर किया है।

              इसमें सैवेज कहते हैं कि, “(अमेरिकी) संविधान तब लिखा गया जब लोग हवाई यात्रा भी नहीं करते थे। कहने की जरूरत नहीं है, टेलीविजन से पहले, इंटरनेट से पहले, रेडियो और हवा से पहले।”

              संविधान के कई तर्क अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। अब कुछ लोग गर्भावस्था के आखिरी समय में अमेरिका आकर बच्चे को जन्म देते हैं, जिससे बच्चे को तुरंत नागरिकता मिल जाती है। फिर उसी आधार पर वे अपने परिवार के बाकी लोगों को भी अमेरिका बुला लेते हैं।

              ऐसे उदाहरण अब आम हो गए हैं और इसके कारण अमेरिका में भाषा और पहचान बदल रही है। अब प्रवासियों में देश के प्रति पहले जैसी भावना भी नहीं दिखती।

              कैलिफोर्निया में भारत-चीन के लोगों का दबदबा

              चिट्ठी में कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे जुड़ी नौकरियों में भारत और चीन के लोगों का बहुत ज्यादा असर है। वहां की कंपनियों में भर्ती का माहौल ऐसा बन गया है कि बाकी लोगों के लिए मौके बहुत कम रह गए हैं।

              इन जगहों पर नौकरी पाने के लिए योग्यता से ज्यादा यह मायने रखता है कि आप किस देश से हैं, और उसके अनुसार सिस्टम इस तरह काम कर रहा है कि भारतीय और चीनी लोगों को प्राथमिकता मिलती है। यानी उसके हिसाब से भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है, बल्कि कुछ खास समूहों के पक्ष में झुकी हुई है।

              प्रवासियों के लिए काम करने वाले संगठन पर नाराजगी

              चिट्ठी में लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली अमेरिकन सिविल लिबर्टी यूनियन पर भी निशाना साधा गया है। इसमें कहा कि यह संगठन अवैध प्रवासियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों का समर्थन करता है।

              इस संगठन पर कड़े कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रवासी स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिसका खर्च करदाताओं पर पड़ता है।

              वेलफेयर स्कीम में धोखाधड़ी और प्रवास से सांस्कृतिक व भाषाई पहचान पर असर पड़ने की बात भी कही गई है। आरोप लगाया गया है कि अब अस्पतालों में प्रवासी ज्यादा इलाज कराते हैं और सिस्टम का गलत फायदा उठा रहे हैं। वे छोटी बीमारी पर भी बहुत बड़ा खर्च दिखाते हैं।

              157 साल पहले मिला जन्मजात नागरिकता का अधिकार

              दुनिया में दो तरह से बच्चों को नागरिकता मिलती है-

              • पहला- राइट ऑफ सॉइल यानी कि बच्चे का जहां जन्म हुआ हो, वह अपने आप वहां का नागरिक बन जाता है।
              • दूसरा- राइट ऑफ ब्लड यानी कि बच्चे के मां-बाप जहां के नागरिक हों, बच्चे वहीं के नागरिक माने जाएंगे।

              अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता (राइट ऑफ सॉइल) मिलती है। 1865 में गृहयुद्ध खत्म होने के बाद, जुलाई 1868 में संसद में 14वें संशोधन को मंजूरी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि देश में पैदा हुए सभी अमेरिकी नागरिक हैं। इस संशोधन का मकसद गुलामी के शिकार अश्वेत लोगों को अमेरिकी नागरिकता देना था।

              हालांकि, इस संशोधन की व्याख्या इस प्रकार की गई है कि इसमें अमेरिका में जन्में सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेट्स कुछ भी हो।

              इस कानून का फायदा उठाकर गरीब और युद्धग्रस्त देशों से आए लोग अमेरिका आकर बच्चों को जन्म देते हैं। ये लोग पढ़ाई, रिसर्च, नौकरी के आधार पर अमेरिका में रुकते हैं। बच्चे का जन्म होते ही उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। नागरिकता के बहाने माता-पिता को अमेरिका में रहने की कानूनी वजह भी मिल जाती है।

              अमेरिका में यह ट्रेंड काफी लंबे समय से जोरों पर है। आलोचक इसे बर्थ टूरिज्म कहते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है।

              अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन बच्चों को जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है। अमेरिका में यह कानून 158 साल से लागू है।

              अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन बच्चों को जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है। अमेरिका में यह कानून 158 साल से लागू है।

              कोर्ट में बर्थडे सिटिजनशिप पर सुनवाई जारी

              ट्रम्प ने 20 जनवरी 2025 को आदेश जारी कर जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) पर रोक लगाने की कोशिश की थी। इसके कुछ ही दिन बाद फेडरल कोर्ट ने इस पर अस्थायी रोक (पहले 14 दिन) लगा दी।

              इसके बाद अदालतों में इस आदेश को चुनौती दी गई और कई जगहों पर कोर्ट ने इसे लागू होने से रोका हुआ है। मामला अभी भी कानूनी लड़ाई में है और अलग-अलग अदालतों में सुनवाई चल रही है।

              ट्रम्प ने 20 जनवरी 2025 को शपथ लेने के बाद एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत कर जन्मजात नागरिकता कानून पर रोक लगा दी थी।

              ट्रम्प ने 20 जनवरी 2025 को शपथ लेने के बाद एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत कर जन्मजात नागरिकता कानून पर रोक लगा दी थी।


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