गौठान में संचालित आयमूलक गतिविधियों से महिलाएं हो रही हैं आत्मनिर्भर…

              • महिलाओं ने वर्मी कम्पोस्ट विक्रय से कमाएं 5 लाख रुपए

              रायपुर: शासन की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना ने लोगों के जीवन में बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित हो रही है। इस योजना ने ग्रामीणों के जीवन में ख़ुशहाली लाने का काम किया है। लोगों को अतिरिक्त आय का साधन मिला और ग्रामीण महिलाओं को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

              गरियाबंद जिले के ग्राम भेंड्री में गोधन न्याय योजना के तहत नियमित गोबर खरीदी हो रही है और गौठान में कार्यरत रानी दुर्गावती स्व-सहायता समूह क्रय गोबर से वर्मी कम्पोस्ट निर्माण कर रहीं है। समूह की सभी 15 सदस्य नियमित रूप से गौठान आकर वर्मी कम्पोस्ट बनाने का काम कर रही हैं। अब तक समूह ने 01 हजार 252 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट विक्रय कर लगभग 5 लाख रुपए की आमदनी हासिल की है।

              समूह के सदस्यों ने बताया कि गौठान बनने से हमें गांव में ही रोजगार और अतिरिक्त आय का जरिया मिला है। समूह की महिलाओं ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का धन्यवाद भी दिया है।

              महिलाओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी कार्यक्रम और गोधन न्याय योजना ग्रामीणों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। गांव में रह रहे लोगों के लिए यह योजनाएं आजीविका को बेहतर बनाने में मददगार साबित हुई है। गौठानों में कई आजीविका मूलक गतिविधियां संचालित होने से लोगों को गौठानों में रोजगार का नया अवसर मिला है।


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